खुद कार्रवाई नहीं करने दी, फिर भ्रष्टाचार का आरोप लगा सीएमओ को सस्पेंड करवा दिया, अब एक ऑडियो से बुरे फंसे विधायक

 

कैथल के भाजपा विधायक लीला राम गुर्जर, जो यहां के सीएमओ पर कार्रवाई को लेकर अब तक पूरे मसले में खुद अपने ही जाल में फंसते नजर आ रहे हैं।

  • 20 सितंबर को कैथल के आर्य डायग्नोस्टिक सेंटर पर रेड की थी सेहत विभाग की टीम ने, 40 हजार रुपए लेकर जयपुर की महिला को बताया था गर्भ में पल रहा लड़का है
  • 29 सितंबर को विधायक लीला राम ने भ्रष्टाचार का आरोप लगा सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाट्टान को सस्पेंड करने की सिफारिश की, 7 अक्टूबर को सस्पेंशन ऑर्डर आए
  • इसी मामले में जहां जमकर विरोध हो रहा है, वहीं अब वायरल हो रहे दो ऑडियो क्लिप बता रहे हैं किस तरह से विधायक ने सिविल सर्जन को कार्रवाई करने से मना किया था

(प्रदीप ढुल). एक ओर जहां कोरोना संकट के चलते देशभर में रामलीला पर संशय बना हुआ है कि इस बार मंचन होगा या नहीं, इसी बीच कैथल में एक अनोखी लीला चर्चा में है। यह लीला भाजपा विधायक लीला राम की है, जिसमें वह खुद ही घिरते नजर आ रहे हैं। दरअसल, बीते दिनों लीला राम ने प्रदेश के सेहत मंत्री को चिट्‌ठी लिखकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया तो कैथल के चीफ मेडिकल ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया गया। इस सस्पेंशन के 6 दिन बाद अब एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें विधायक खुद ही सीएमओ को भ्रूण की लिंग जांच जैसे एक संगीन मामले में कार्रवाई करने से रोकते सुने जा सकते हैं। देखा जाए तो इन्होंने तो प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ को भी नहीं बख्शा, जिसकी शुरुआत खुद प्रधानमंत्री ने हरियाणा में बेटियों की घटती संख्या के कारण पानीपत की धरती से की थी।

इस तरह से समझें फर्ज और राजनीति के बीच की खींचतान को

कैथल के आर्य डायग्नोस्टिक सेंटर पर रेड करने पहुंची स्वास्थ विभाग की टीम।

कैथल के आर्य डायग्नोस्टिक सेंटर पर रेड करने पहुंची स्वास्थ विभाग की टीम।

  • 20 सितंबर को सेहत विभाग की टीम ने शहर के आर्य डायग्नोस्टिक सेंटर पर रेड की। यहां 40 हजार रुपए लेकर जयपुर की महिला की गर्भस्थ भ्रूण की लिंगजांच की गई। जांच में लड़का बताया गया। महिला एक्साइटमेंट के चलते दोबारा इसी सेंटर पर आ गई। डॉ. गौरव पूनिया की टीम ने डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर दिया। वहीं डॉ. विजय कुमार आर्य, दलाल और जयपुर की महिला पर केस दर्ज किया गया।
विधायक लीला राम गुर्जर की तरफ से सेहत मंत्री अनिल विज को लिखा गया पत्र।

विधायक लीला राम गुर्जर की तरफ से सेहत मंत्री अनिल विज को लिखा गया पत्र।

  • 29 सितंबर को कैथल विधायक लीला राम ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को पत्र लिखकर सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाट्टान को सस्पेंड करने की सिफारिश की।
विभाग की तरफ से सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाट्‌टान को आया सस्पेंशन लैटर।

विभाग की तरफ से सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाट्‌टान को आया सस्पेंशन लैटर।

  • 7 अक्टूबर को विधायक की सिफारिश पर सिविल सर्जन को सस्पेंड कर दिया गया। सस्पेंशन के दौरान डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विस हरियाणा हेडक्वार्टर दिया गया।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन की तरफ से सीएम को सौंपा गया पत्र।

हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन की तरफ से सीएम को सौंपा गया पत्र।

  • 8 अक्टूबर को हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन ने विरोध में सीएम मनोहर लाल को पत्र सौंपा। इसमें आरोप लगाया कि विधायक लीला राम गुर्जर ने आर्य डायग्नोस्टिक सेंटर पर रेड करने गई टीम पर दबाव बनाते हुए तुरंत प्रभाव से वह स्थान छोड़ देने को कहा था। टीम ने उसके बाद भी रेड जारी रखी तो विधायक ने इसके गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
  • 10 अक्टूबर को हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसिज एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी कैथल पहुंची। राज्य प्रधान डॉ. जसबीर परमार ने कहा कि सिविल सर्जन को बहाल नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
  • 12 अक्टूबर को इस मामले को नया मोड़ देने वाले दो ऑडियो क्लिप वायरल हुए। इनमें से एक में खुद विधायक लीला राम को सीएमओ डॉ. जयभगवान जाट्‌टान को कार्रवाई नहीं करने को कह रहे हैं। दूसरे में विधायक का पीए पहले हो चुकी बात को याद करवाते हुए कार्रवाई नहीं करने की बात कह रहा है। हालांकि दोनों ही बार डॉ. जाट्‌टान इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं होने की बात कहते हैं।

अब आगे क्या?
एसोसिएशन ने कहा है कि सिविल सर्जन को बहाल नहीं किया गया तो 14 अक्टूबर को पूरे हरियाणाभर के डॉक्टर काले बैज लगाकर विरोध जताएंगे। 15 अक्टूबर को कैथल में दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल से आंदोलन की शुरुआत करेंगे। इस दौरान सिर्फ इमरजेंसी और कोरोना केस ही देखेंगे। फिर भी मांग नहीं मानी जाती है तो पूरे हरियाणा के लिए रणनीति तैयार होगी

आम जनता का सवाल
दूसरी ओर प्रदेश की आम जनता पूछ रही है कि सरकार में विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री से क्या ऐसी ही उम्मीद की जाती है? क्या आम आदमी को दिखाने के लिए ढोंग रचा जाता है कि ये ऐसी सरकार है, जिसमें अधिकारियों पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है? ऐसी सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए और अगर सच में प्रदेश के सीएम और डिप्टी सीएम ईमानदार हैं तो मामले की उचित जांच करवाई जाए।

 

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