खाने में कहीं नकली जीरे का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं आप, ऐसे करें पहचान

जीरा घर की रसोई का खास मसाला होता है. ये खाने का स्वाद तो बढ़ाता ही है, साथ ही इसमें एंटी-ऑक्सिडेंट, फाइबर, आयरन, कॉपर, पोटैशियम, मैगनीज, कैल्शियम, जिंक, मैगनीशियम और तमाम विटामिन्स भी पाए जाते हैं. ऐसे में ये सेहत से जुड़ी तमाम परेशानियों में भी राहत देता है.

लेकिन आजकल बाजार में नकली जीरा भी बिक रहा है. देखने में ये बिल्कुल असली सा नजर आता है. ऐसे में लोग कई बार इसमें फर्क नहीं कर पाते और घर पर लाकर खाने में इस्तेमाल करने लगते हैं. माना जाता है कि नकली जीरा नदियों के किनारे उगने वाली उन जंगली घासों से बनाया जाता है, जिनसे फूल झाड़ू बनती है. ये जीरा शरीर को कई तरह की परेशानियां दे सकता है. जानिए इसके बारे में.

ऐसा बनाया जाता है नकली जीरा

जीरे को बनाने के लिए गुड़ के शीरे का इस्तेमाल किया जाता है.जिस घास से फूल झाड़ू बनती है, उस घास को पहले पानी में उबाला जाता है. उसके बाद उसे शीरे में पकाया जाता है और सुखा लिया जाता है. घास का रंग जीरे जैसा होते ही इसे पत्थर के बने पाउडर में डाल दिया जाता है. इसके बाद इसे छलनी से छान लिया जाता है. कई बार इसमें स्लरी पाउडर भी मिलाया जाता है ताकि इसका रंग एकदम जीरे की तरह दिखे.

ये हो सकती हैं परेशानियां

नकली जीरा खाने से पेट की परेशानियां हो सकती हैं. इसकी वजह से पेट में दर्द और स्टोन जैसी दिक्कत भी हो सकती है. इसके सेवन से त्वचा संबन्धी रोग होने का भी खतरा रहता है. साथ ही नकली जीरा इम्यूनिटी को कमजोर करता है.

ऐसे करें पहचान

इसकी पहचान करना बहुत मुश्किल नहीं है. इसके लिए एक कटोरी में पानी लें और उसमें जीरा डालकर छोड़ दें. अगर जीरा रंग छोड़े या टूट जाए तो समझ लीजिए कि ये नकली है. इसके अलावा नकली जीरे में किसी भी तरह की खुशबू नहीं आती है.

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