खाकी Vs आम आदमी:जिन 30-40 ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर जलती कार से 5 लोगों की जान बचाई, पुलिस ने उन्हीं पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा ठोंका

 

पुलिस का दावा- इसी एंबुलेंस पर पथराव हुआ। - Dainik Bhaskar

पुलिस का दावा- इसी एंबुलेंस पर पथराव हुआ।

  • जमवारामगढ़; 17 फरवरी की रात 9 बजे कार-ट्रक की भिंड़त में कार चालक की जिंदा जलकर मौत हुई
  • थाना प्रभारी: 30-40 लाेगों ने एंबुलेंस पर पथराव किया, पुलिस की गाड़ी के शीशे तोड़े
  • मृतक का जीजा: गांववालों की वजह से मेरा परिवार जिंदा है, मैं उनका शुक्रगुजार हूं

17 फरवरी को रात 9 बजे जमवारामगढ़ थाने के बहलोड़ गांव के पास हाईवे पर कार-ट्रक की भिड़ंत में कार चालक की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। गांव के 30-40 लोगों ने जान जोखिम में डालकर कार सवार 5 लोगों को बचा लिया था। चौंकाने वाली बात ये है कि पुलिस ने इन्हीं 30-40 लोगों पर राजकार्य में बाधा डालने का केस दर्ज किया है।

पुलिस के मुताबिक जब वे मौके पर पहुंचे तो इन्होंने पुलिसकर्मियों से मारपीट की। एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। जबकि कार में जान गंवाने वाले चालक के जीजा का कहना है कि पुलिस झूठ बोल रही है। मैं तो गांववालों का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मेरे परिवार के 5 लोगों को बचाया।
गांव के लाेगाें ने हाईवे जाम कर दिया, पथराव से मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को चोटें आईं, इसलिए मामला दर्ज किया :पुलिस

^एक्सीडेंट के बाद सूचना पर जब पुलिस माैके पर पहुंची ताे गांववालों ने हाथापाई की। एंबुलेंस व पुलिस की गाड़ी के शीशे फाेड़ दिए। करीब आधे घंटे तक हाईवे जाम कर दिया। हमने समझाने की काफी काेशिश की लेकिन करीब 30 से 40 लाेग हंगामा करने लगे। मामले में रायसर चाैकी प्रभारी नेमीचंद ने मामला दर्ज कराया है कि रात नाै बजे एक्सीडेंट की सूचना मिली थी। तब वे माैके पर पहुंचे ताे वहां करीब 80 से 90 लाेगाें की भीड़ थी। समझाने का प्रयास किया। तभी एंबुलेंस आ गई। लाेगाें ने एंबुलेंस पर पथराव कर शीशे ताेड़ दिए। पुलिस की सरकारी जीप पर भी पथराव किया। पथराव व मारपीट में माैके पर पहुंचे पुलिसकर्मियाें के चाेटें आईं।

– मनाेज कुमार, थाना प्रभारी, जमवारामगढ़

मैं 50 मी. पीछे ही दूसरी कार में था, पुलिस झूठ बोल रही है, वो खुद देर से आई, गांववालों ने पानी-मिट्‌टी से आग बुझाई: जीजा

आकाश, मृतक कार चालक जीतू का जीजा।

आकाश, मृतक कार चालक जीतू का जीजा।

^आग लगने वाली कार के 50 मी. पीछे दूसरी कार में परिवार के अन्य लोग आ रहे थे। मैं कार चला रहा था। हादसा मेरे सामने ही हुआ। टक्कर के बाद कार में तुरंत आग लग गई। 5 से 7 मिनट में ही गांव के काफी लाेग आ गए। मिट्टी डाली। बाइक पर पानी से भरी बाल्टियां लाकर आग बुझाने का प्रयास किया। मैं जिंदगी भर उनका आभारी रहूंगा, जिन्हाेंने मेरे परिवार के पांच लाेगाें की जिंदगी बचाई है। मेरे सामने पथराव नहीं हुआ। एक किमी दूरी से पुलिस काे आने में पाैन घंटा लग गया। गलतियां छिपाने के लिए पुलिस झूठ बाेल रही है।

 

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