खगोलीय घटना:150 साल बाद बन रहा है दुर्लभ संयोग, पिता सूर्य पर जब ग्रहण लगेगा; उसी दिन पुत्र शनि की जयंती

 

फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

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  • साल का पहला सूर्यग्रहण 10 जून को, अरुणाचल के पूर्वी-उत्तरी स्थानों पर आंशिक रूप में दिखेगा

करीब 150 साल एक दुर्लभ संयोग 10 जून को बन रहा है, जब पिता सूर्य पर ग्रहण रहेगा और उनके पुत्र शनि की जयंती मनाई जाएगी। ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष में 10 जून को 16 दिन में दूसरा ग्रहण होगा। एक संयोग यह भी है कि शनि अपनी ही राशि मकर में वक्री हैं। इन संयोगों के कारण इस बार शनि जयंती खास हो गई है। यह सूर्यग्रहण कंगनाकार होगा।

यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका के उत्तर पूर्वी भाग, उत्तरी एशिया, उत्तरी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। भारत में केवल अरुणाचल के पूर्वी-उत्तरी भाग में सूर्यास्त के समय ही आंशिक रूप से दिखेगा, इसलिए शेष भारत में इसका कोई असर नहीं रहेगा। मंदिर भी खुले रहेंगे। भारतीय समयानुसार सूर्यग्रहण दोपहर 1.42 से शाम 6.43 बजे तक रहेगा। इसके पहले 26 मई को चंद्रग्रहण लगा था। शास्त्रों के मुताबिक, शनि जयंती पर मकर में वक्री शनि के साथ सूर्य ग्रहण इससे पहले 26 मई 1873 में हुआ था।

भारत में ग्रहण का असर नहीं; इसलिए न मंदिर बंद होंगे, न दान-स्नान होगा

आचार्य एके मिश्र के अनुसार, ग्रहण जहां दिखाई नहीं देगा वहां इसका प्रभाव भी नहीं रहेगा। यानी न मंदिर बंद होंगे और न स्नान-दान होगा। शनि, सूर्य के पुत्र हैं। सूर्य की पत्नी छाया होने के कारण शनि का रंग काला है। मनु, यमराज इनके भाई तथा यमुनाजी इनकी बहन है। शनि धीमे चलने वाला ग्रह है। इसे सूर्य की परिक्रमा करने के लिए 27 साल लगते हैं। शनै: शनै: अर्थात धीरे धीरे चलने के कारण इसको शनैश्चराय भी कहते हैं।

शनि जयंती पर क्या करें

शरीर में शनि का वास जोड़ों, त्वचा एवं हड्डियों में होता है। शनिवार को इनमें विकार उत्पन्न होता है, इसलिए इस दिन शरीर की तेल से मालिश करनी चाहिए। शनि जयंती पर शनि की प्रसन्नता के लिए तेल, काला कपड़ा, उड़द, महिषी, करथी, लोहा, काली गाय, काले फूल, काला तिल, नीलम, सुवर्ण अर्पित करना चाहिए।

 

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