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क्या है डार्क वेब और इससे खतरे में है भारतीय डेबिट-क्रेडिट कार्ड का डाटा

डार्क वेब वह है जिसे इंटरनेट की अंधेरी दुनिया के नाम से जाना जाता है, इस पर ही लाखों भारतीय बैंकों के डेबिट-क्रेडिट कार्ड का डेटा बेचा जा रहा है। इसके जरिए साइबरक्रिमिनल्स लगभग 920 करोड रुपए तक का नुकसान पहुंचा सकते हैं। ZDNet के अनुसार डेबिट और क्रेडिट कार्ड के डिटेल्स डार्क वेब की पुरानी दुकान जोकर स्टैश पर आज भी उपलब्ध रहते हैं। इस दुकान पर एक कार्ड का डाटा ₹7000 में बेचा जाता है। आज हम आपको डार्क वेब के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं ताकि आप इनसे अपना बचाव कर सकें।

क्या है डीप और डार्क वेब

आपने यह देखा ही होगा कि जब भी हम ऑनलाइन कुछ भी सर्च करते हैं तो तुरंत ही हमें लाखों नतीजे सामने दिखाई देने लगते हैं। हालांकि यह सिर्फ चार परसेंट नतीजा ही होता है जो हमारे सामने दिखाई दे रहा होता है। 96 परसेंट नहीं दिखाई देने वाला सर्च रिजल्ट ही डार्क वेब कहलाता है। इसके अंतर्गत बैंक अकाउंट डिटेल्स, कंपनियों का डेटा और रिसर्च पेपर जैसे जानकारियां उपलब्ध होती है। इसका एक्सेस उसी व्यक्ति को मिल सकता है जिसे इसके संबंध में पूरी जानकारी प्राप्त होती है।
हालांकि इसका एक बड़ा हिस्सा कानूनी दायरे के अंतर्गत आता है। इसे बनाने का मकसद भी उपयोगकर्ता के हितों की हिफाजत करना है। लेकिन इसका एक छोटा सा हिस्सा डार्क वेब के अंतर्गत आता है। जिसमें गैरकानूनी काम किए जाते हैं।

कैसे होता है इसमें कारोबार

डार्क वेब वह है जिसे आप आसानी से किसी भी ब्राउज़र से एक्सेस नहीं कर सकते। इसे एक्सेस करने के लिए खास तरह के ब्राउज़र की मदद लेनी पड़ती है। जिसे अनियन राउटर जैसे ब्राउज़र के नाम से जाना जाता है। नाम के अनुसार इसमें अनियन की तरह कई परतें होती है जिसमें यूजर का IP अड्रेस लगातार ही बदलता रहता है। हालांकि इन्हें ट्रेस कर पाना लगभग नामुमकिन बात होती है। इसमें सर्च करने वाले और होस्ट करने वाले दोनों के ही नाम गुम नाम होते हैं। यहां लेनदेन वर्चुअल करंसी में होती है।
चूंकि इनमें बैंक की कोई भूमिका नहीं होती इसलिए इन्हें ट्रैक कर पाना संभव नहीं हो पाता। जिसके कारण अंधेरी दुनिया के कारोबारियों को बहुत फायदा होता है। डार्क वेब पर काम करने के लिए बहुत ज्यादा सेट अप की भी आवश्यकता नहीं होती। सामान्य से लैपटॉप और कंप्यूटर को भी डार्क वेब की वेबसाइट में परिवर्तित किया जा सकता है।

इससे बचना है बेहद मुश्किल

अगर आप इससे बचना चाहते हैं तो आपके लिए यही बेहतर होगा कि आप जितना हो सके इससे दूरी बनाकर रखें। अगर एक बार कोई सामान्य इंसान इस अंधेरी दुनिया में चला जाता है तो वहां से बाहर निकल पाना बेहद ही मुश्किल हो जाता है। आपकी छोटी सी गलती से आपके सारे निजी फोटो, वीडियो और अकाउंट डिटेल इन अपराधियों के हाथ लग सकते हैं। जांच एजेंसियां भी आसानी से इन तक नहीं पहुंच पाती। इन तक पहुंच पाना तभी संभव हो पाता है जब इनसे ही जुड़े लोग जांच एजेंसियों की मदद करते हैं।

सरकार क्यों हो जाती है इनके सामने बेबस?

अमेरिका ने इसे अपने जासूसों से किए गए कम्युनिकेशन को सीक्रेट रखने के लिए बनाया था। पहले यह सिस्टम गुप्त संस्थाओं और मिलिट्री के लिए बनाया गया था। जहां से यह धीरे से लिक हुआ और अपराधियों तक पहुंच गया। बाद में यह आम लोगों के लिए भी लॉन्च कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि सरकार भी इनके सामने बेबस हो चुकी है।

डेबिट-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते वक़्त हमेशा रखें इन बातों का ख्याल

ऐसे एटीएम का उपयोग ना करें जो आपको खराब स्थिति में दिखाई दे। ऐसे एटीएम नकली भी हो सकते हैं। हो सकता है कि एटीएम में खुफिया कैमरे लगे हो इसलिए पिन कोड डालते समय हमेशा कीपैड को कवर करके रखें। ऑनलाइन साइट्स का प्रयोग करते समय उसकी छानबीन अच्छी तरह से कर ले। हमेशा ही सर्टिफाइड साइट्स का उपयोग करें। ओपन और पब्लिक वाईफाई का उपयोग करने से बचें, क्योंकि ऐसी ही चीजें इन चोरों के निशाने पर होती है। हर थोड़े दिनों में अपना पासवर्ड बदलते रहे। अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं तो आप बहुत हद तक डार्क वेब की अंधेरी दुनिया से बच सकते हैं।
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