क्या ‘ड्रैगन’ कर रहा युद्ध की तैयारी? लद्दाख के सामने वाले इलाके में की…

लद्दाख में भारत औऱ चीन के बीच पिछले साल से जारी गतिरोध अभी तक चला आ रहा है। पिछले साल इसी महीने गलवान घाटी में भारतीय सेना के हाथों मुंह की खाने के बाद चीन के हौसले पस्त हैं। ठंडे इलाके में चीन के सैनिक न भारत की सेना का मुकाबला करने में सक्षम हैं और न ही मौसम का। ऐसे में अब चीन air exercises पर फोकस करता हुआ नजर आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन की वायुसेना ने ईस्टर्न लद्दाख के सामने वाले अपने इलाके में स्थित airbases से बड़ी aerial exercise की है। इस अभ्यास पर भारत की तरफ से पैनी नजर रखी गई।

सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि लगभग 21-22 चीनी लड़ाकू विमानों ने, जिनमें मुख्य रूप से जे-11 शामिल हैं जो कि एसयू-27 लड़ाकू विमानों की चीनी कॉपी हैं और कुछ जे-16 लड़ाकू विमानों ने पूर्वी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र के सामने एक अभ्यास किया। सूत्रों ने कहा कि चीनी लड़ाकू विमानों की गतिविधियां इसके Hotan, Gar Gunsa और Kashgar airfields से हुईं, जिन्हें हाल ही में उन्नत किया गया है ताकि कंक्रीट संरचनाओं के साथ-साथ सभी प्रकार के लड़ाकू विमानों द्वारा संचालन को सक्षम बनाया जा सके ताकि इसके विभिन्न airbases पर मौजूद fighters की संख्या को छिपाया जा सके।

 

सूत्रों ने कहा कि चीनी विमान हवाई अभ्यास के दौरान अपने क्षेत्र के भीतर ही रहे। आपको बता दें कि लद्दाख क्षेत्र में भारतीय लड़ाकू विमानों की गतिविधि पिछले साल से काफी बढ़ गई है। सूत्रों ने बताया, “इस साल चीनी सैनिकों और वायु सेना की ग्रीष्मकालीन तैनाती के बाद, भारतीय वायु सेना भी लद्दाख में मिग -29 सहित अपने लड़ाकू विमानों की टुकड़ियों को नियमित रूप से तैनात कर रही है।

भारतीय वायु सेना नियमित रूप से अपने सबसे सक्षम राफेल लड़ाकू विमानों को लद्दाख के आसमान पर उड़ाती है, जिसने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय क्षमता को बढ़ाया है। भारत के पास इस वक्त 24 राफेल विमान आ चुके हैं। क्योंकि इनमें से 24 विमान पहले से ही भारतीय सूची में हैं। सूत्रों ने कहा कि भले ही चीन ने पैंगोंग झील क्षेत्र से सैनिकों को हटा लिया है, लेकिन उन्होंने HQ-9 और HQ-16 सहित अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को स्थानांतरित नहीं किया है जो लंबी दूरी पर विमानों को निशाना बना सकते हैं।

आपको बता दें कि पिछले साल अप्रैल-मई में, चीन के साथ तनाव के प्रारंभिक चरण में, भारतीय बलों ने एसयू -30 और मिग -29 को forward air bases पर तैनात किया था। इन विमानों ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर में किसी भी चीनी विमान की भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसने की कोशिश को पूरी तरह से नाकाम करने में मदद की थी। भारतीय वायु सेना लद्दाख क्षेत्र में चीनियों पर बढ़त रखती है क्योंकि उनके fighters को बहुत ऊंचाई वाले ठिकानों से उड़ान भरनी होती है, जबकि भारतीय बेड़ा मैदानी इलाकों से उड़ान भर सकता है और लगभग कुछ ही समय में पहाड़ी क्षेत्र तक पहुंच सकता है। भारतीय वायु सेना अपने विमानों की गति के कारण पूरे देश में तीव्र गति से aircraft squadrons को तैनात कर सकती है और सीमित संसाधनों के बावजूद उनका बहुत प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकती है।

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