कोविड वार्ड में मौत के बाद आपातकालीन यूनिट के अंदर से संक्रमित शव लेकर गुजरे, जिस ट्राॅली पर लाए, उसे दूसरे मरीज करते रहे इस्तेमाल

 

जिस ट्राॅली पर कोरोना संक्रमित शव लेकर आए, उसे गेट पर ही दूसरे ट्रालियों के बीच छोड़कर चले गए।

संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जेएलएन में सोमवार को ऐसी लापरवाही बरती गई, जिसका खामियाजा किसी भी निर्दोष को उठाना पड़ सकता है। जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की पहली मंजिल पर बने कोविड वार्ड में भर्ती किशनगढ़ के राजा रेड्‌डी निवासी बुजुर्ग की सोमवार को कोरोना से मौत हो गई।

इसके बाद सुबह 10.15 बजे पीपीई किट पहने चार युवक संक्रमित शव को ट्राॅली पर लेकर आपातकालीन यूनिट के हाल में पहुंच गए, जबकि अब तक कोरोना संक्रमित शव को मोक्षधाम ले जाने के लिए न्यूरो सर्जरी यूनिट वाले रास्ते का इस्तेमाल होता रहा है, ताकि कोई भी व्यक्ति कोरोना वायरस के संपर्क में न आए। न्यूरो सर्जरी यूनिट का गेट पुलिस चौकी पार्किंग के पास होने के कारण वहां आमजन की आवाजाही नहीं होती है। इधर ही शवों को मोक्षधाम ले जाने के लिए एंबुलेंस खड़ी रहती हैं।

दूसरी ओर, आपातकालीन यूनिट में कोरोना संक्रमित शव लेकर पहुंचे युवक आमजन के बीच ही काफी देर तक खड़े रहे। सुबह का समय होने के कारण आपातकालीन यूनिट में मरीजों सहित परिजनों की काफी भीड़ थी। दवा काउंटर के पास भी कई लोग खड़े थे। लोग कोरोना संक्रमित शव के बगल से आ-जा रहे थे, उन्हें यह जानकारी भी नहीं थी कि ट्राॅली पर रखा शव कोरोना संक्रमित है। पीपीई किट पहने युवक वहां मौजूद लोगों से बातचीत भी करते दिखे।

सोमवार को आपातकालीन यूनिट से कोरोना संक्रमित शव को लेकर जाते हुए।

सोमवार को आपातकालीन यूनिट से कोरोना संक्रमित शव को लेकर जाते हुए।

गेट पर 10 मिनट तक शव ट्राॅली पर पड़ा रहा, इस दौरान लोगों की आवाजाही जारी रही।

गेट पर 10 मिनट तक शव ट्राॅली पर पड़ा रहा, इस दौरान लोगों की आवाजाही जारी रही।

संक्रमित शव को एंबुलेंस में रखने के दौरान भी लोग पास में ही खड़े रहे।

संक्रमित शव को एंबुलेंस में रखने के दौरान भी लोग पास में ही खड़े रहे।

जेएलएन प्रशासन से जानलेवा लापरवाही पर 3 सवाल

1. कोरोना संक्रमित शव पूर्व निर्धारित गेट से ही बाहर क्यों नहीं निकाला गया?

2. जिस ट्राॅली पर संक्रमित शव लेकर गए, उसे आपातकालीन यूनिट में ही क्यों छोड़ दिया? 3. संक्रमित शव को ले जाने के बाद भी आपातकालीन यूनिट को सेनिटाइज्ड क्यों नहीं किया?

आपातकालीन यूनिट के मुख्य गेट पर 10 मिनट तक पड़ा रहा संक्रमित शव

आपातकालीन यूनिट में ड्यूटी कर रहे चिकित्सक व नर्सिंग का भी कहना था कि ऐसे तो कोई भी व्यक्ति कोरोना की चपेट में आ सकता है। काेराेना संक्रमित शव करीब 10 मिनट तक आपातकालीन यूनिट के मुख्य गेट पर ही ट्राॅली में पड़ा रहा। इस दौरान अस्पताल में आने वाले लाेग जाने-अनजाने शव के निकट से हाेकर निकलते रहे। बाद में शव को एंबुलेंस से वहां से ले जाया गया।

आपातकालीन यूनिट के गलियारे को सेनिटाइज्ड तक नहीं कराया

शव काे वार्ड से नीचे लेकर आने के दौरान पूरे रास्ते काे सेनिटाइज्ड करवाया जाना चाहिए था, लेकिन यहां आपातकालीन यूनिट तक काे सेनिटाइज्ड तक नहीं करवाया गया।

ट्राॅली आपातकालीन यूनिट के गेट पर छोड़ गए
काेराेना संक्रमित शव काे एम्बुलेंस में डाले जाने के बाद चाराें युवकों ने जिस ट्रॉली पर शव रखा हुआ था, उसे वहीं आपातकालीन यूनिट के गेट पर ही छाेड़ दिया। इस ट्रॉली का उपयोग बाद में यहां आने वाले मरीजों ने किया। नियमों के तहत इसे सेनिटाइज्ड करवाया जाना चाहिए था। इस ट्रॉली काे छूने वाले लाेग अब कभी भी काेराेना संक्रमित हाे सकते हैं।

 

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