कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों का भी इलाज:छत्तीसगढ़ के रायपुर में डाॅक्टर ऑन स्ट्रीट का ट्रायल काॅल पर घर पहुंचेगी टीम, टेस्ट भी वहीं

 

ऑक्सीजन ऑन व्हील की कामयाबी के कारण तीसरी लहर के लिए योजना। - Dainik Bhaskar

ऑक्सीजन ऑन व्हील की कामयाबी के कारण तीसरी लहर के लिए योजना।

कोरोना की दूसरी लहर में राजधानी में ऑक्सीजन ऑन व्हील के कामयाब प्रयोग की वजह से अब शहर में डाक्टर ऑन स्ट्रीट का ट्रायल शुरू हुआ है। प्रयोग वैसा ही है, यानी एक काॅल पर ऑक्सीजन ही नहीं बल्कि पूरे साजो-सामान के साथ डाक्टर-पैरामेडिकल स्टाफ की टीम ही सीधे घर पहुंचेगी और जरूरी टेस्ट भी घर में ही हो जाएंगे। इंडोर स्टेडियम से डॉक्टर ऑन स्ट्रीट योजना का ट्रायल रन चल रहा है। कुछ दिक्कतें आई हैं, जिनका हल निकाला जा रहा है और नतीजों के पड़ताल के बाद इसी माह के अंत तक यह योजना लांच कर दी जाएगी। इसके लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया जाएगा, जिस पर काॅल निशुल्क रहेगी।

राजधानी में डाक्टर ऑन स्ट्रीट के प्रोजेक्ट में दो कारें तैयार की गई है। इस योजना को नगर निगम और स्मार्ट सिटी के जरिए संचालित करने का प्लान है। इन दोनों ही एजेंसियों ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन ऑन व्हील्स का प्रयोग किया था। इस प्रोजेक्ट में फिलहाल प्लानिंग डाक्टरों और टीम की आउटसोर्सिंग करने की है। ट्रायल यह चल रहा है कि कॉल आने पर टीम कितनी देर में मरीज के घर तक पहुंच पाएगी और वहां इलाज में कितना समय लगेगा? इमरजेंसी में मरीज को रेफर करने के बाद उसके अस्पताल तक पहुंचने में कितनी देर लग सकती है, इसे भी बारीकी से देखा जा रहा है। कॉल सेंटर हाइटेक तकनीक से चलाया जा रहा है। इसमें मोबाइल पर फोन आने के बाद संबंधित के घर तक जीपीएस ट्रेसिंग के जरिए पहुंचने का पूरा रूट चार्ट मोबाइल पर ही टीम को शेयर किया जा रहा है।

डॉक्टर ऑन स्ट्रीट की टीम।

डॉक्टर ऑन स्ट्रीट की टीम।

कॉल सेंटर में टीमें तैनात, अभी मॉक ड्रिल
डॉक्टर ऑन स्ट्रीट के लिए अभी चल रहे ट्रायल रन या मॉक ड्रिल में कॉल सेंटर और दो कारों में मेडिकल स्टॉफ की करीब एक दर्जन लोगों की टीमें तैनात की गई है। जो 24 घंटे सातों दिन की तर्ज पर दिन रात फोन कॉल के जरिए शहर के अलग-अलग लोकेशन पर जाकर इसके तहत इलाज का ट्रायल कर रही है। राजधानी में शहरी प्रशासन की ओर से पहले ही मोबाइल क्लिनिक चलाई जा रही है। इसमें सप्ताह के एक निश्चित दिन पर टीम बस्तियों और स्लम एरिया में जाकर इलाज और टेस्ट करती हैं। डॉक्टर ऑन स्ट्रीट योजना इससे अलग रहेगी। इसमें आपात स्थितियों से लेकर सामान्य स्थितियों में सेहत से जुड़ी आने वाली दिक्कतों का इलाज और जांच की जाएगी। पूरी योजना में डॉक्टर के घर तक पहुंचने और इलाज की सुविधा निशुल्क रहेगी। जबकि टेस्ट निशुल्क रहेगा या नहीं अभी तय नहीं किया गया है। वैसे अगर शुल्क रहा भी तो प्राइवेट लैब से कम रखा जाेगा।

ऑक्सीजन ऑन व्हील प्रयोग भी सफल रहा
राजधानी में दूसरी लहर के दौरान जब ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने लगी। उस वक्त में होम आइसोलेशन के मरीजों के लिए नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने मिलकर ऑक्सीजन ऑन व्हील का प्रयोग किया था। इसके जरिए घरों में ऐसे कोरोना मरीज जिनको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, उन तक ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर पहुंचाए जाते थे। अप्रैल-मई के महीने में 10 हजार से अधिक मरीजों के घरों तक इसके जरिए ऑक्सीजन मुहैया कराई गई।

गाड़ी में रहेंगे जरूरी मेडिकल उपकरण
इस पूरी योजना को डॉक्टर तुहंर दुआर यानी डॉक्टर आपके दरवाजे पर के तौर पर डेवलप किया जा रहा है। मेडिकल टीम के साथ जाने वाली डॉक्टर ऑन स्ट्रीट की गाड़ियों में इलाज और जांच से जुड़े जरूरी मेडिकल उपकरण भी रहेंगे। ऐसी जांच जिनके लिए अस्पताल में जाना जरूरी हो केवल वो ही जांच जैसे एक्सरे, सोनोग्राफी, सीटी स्कैन आदि इसके जरिए नहीं होगा। लेकिन स्वास्थ्य से जुड़े सामान्य टेस्ट जैसे बीपी, शुगर, ईसीजी, खून से जुड़े सैंपल इस वाहन के जरिए लिए जा सकेंगे।

तीसरी लहर में बड़ी आबादी के लिए माना जा रहा उपयोगी
इस योजना में तीसरी लहर के दौरान ऐसे मरीज जो कोरोना की वजह से दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल या डॉक्टर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके इलाज के लिए डॉक्टर ऑन स्ट्रीट एक वरदान बन सकता है। कोरोना के दौरान बहुत से लोग अस्पताल में बहुत ज्यादा जरूरी होने पर भी बचते हैं। यही नहीं, कोरोना के इलाज के लिए भी इस योजना में नई टीमें शामिल की जा सकती हैं। कार के साथ घर तक पहुंचने वाली टीम में एक डॉक्टर, हेल्थ वर्कर नर्स, लैब टेक्नीशियन के अलावा दवाईयों के लिए फॉर्मासिस्ट भी रहेगा। टीम घर पर जाने के बाद दिल जैसी गंभीर बीमारियों समेत दूसरे इलाज भी करेंगी। योजना को अब अंतिम तौर पर डिजाइन किया जा रहा है। हालांकि ट्रायल में जो नतीजे आएंगे, उन्हें भी प्लान में शामिल किया जाएगा या संशोधन होगा। इसमें बड़ी आबादी के हिसाब से और नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।

 

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