कोरोना की तीसरी लहर:बच्चों के लिए जरूरी खून या दूसरी गंभीर जांच सरकारी अस्पतालों में नहीं, प्राइवेट का ही सहारा

 

कालीबाड़ी मातृ-शिशु अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर में भीड़ नहीं फिर भी घंटों बाद नंबर। - Dainik Bhaskar

कालीबाड़ी मातृ-शिशु अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर में भीड़ नहीं फिर भी घंटों बाद नंबर।

तीसरी लहर में बच्चों में कोरोना संक्रमण की आशंकाओं के बीच सरकारी स्तर पर छोटे बच्चों के इलाज और जरूरी टेस्ट के सेटअप में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि शहरी स्वास्थ्य केंद्रों समेत जिला अस्पताल पंडरी, कालीबाड़ी में बच्चों के इलाज के दौरान जरूरी समझे जाने वाले टेस्ट की व्यवस्था ही नहीं है।

इन अस्पतालों में बच्चों में इम्युनिटी पोषण से जुड़ी बीमारियों, खून की कमी जैसी स्थिति में किए जाने वाले टेस्ट प्रोटीन रेशो टेस्ट, ब्लड कल्चर, यूरीन कल्चर, थाइरायड इलेक्ट्रोराइट्स, विटामिन, आदि से जुड़ी जांच नहीं हो पा रही है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण सामने आया तो इलाज के दौरान इनमें से कोई न कोई टेस्ट जरूरी होगा, जिसके लिए अब तक प्राइवेट पर ही निर्भरता है।

तीसरी लहर में बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के भी ज्यादा संक्रमित होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। इस वजह से भास्कर टीम ने शहर में गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों का इलाज करने वाले कालीबाड़ी मातृ एवं शिशु अस्पताल का जायजा लिया। इस अस्पताल को मातृत्व एवं शिशु अस्पताल बने लगभग सालभर होने को आ रहा है। कोरोना काल में डॉ. अंबेडकर अस्पताल का पीडियाट्रिक विभाग यहां शिफ्ट किया गया था। लेकिन यहां नवजात बच्चों और गर्भवती महिलाओं के इलाज के बंदोबस्त में कई खामियां हैं।

कुछ अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चों के लिए ऐसी जांचे लिखी गई हैं, जिनकी सुविधा यहां हैं ही नहीं। गंभीर किस्म की इन जांचों के लिए प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। कोरोना के इलाज से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तीसरी लहर बच्चों को संक्रमित करेगी तो फिर सरकारी स्तर पर बच्चों के अस्पतालों में सभी तरह की जांच की सुविधाएं अभी से जुटानी होंगी। मातृत्व और शिशु अस्पताल में जांच की सुविधाएं एक छत के नीचे मिलेंगी, तभी बच्चों को राहत भी होगी और यह सेटअप भविष्य के लिए भी उपयोगी होगा।

सोनोग्राफी सेंटर खाली, फिर भी करना पड़ रहा इंतजार
भास्कर ने दोपहर एक बजे मातृत्व और शिशु अस्पताल का का दौरा किया तो यहां सोनोग्राफी के लिए दिन में एक बजे के लगभग महिलाओं की भीड़ ही नहीं थी। बावजूद इसके सोनोग्राफी के लिए एक महिला को एक घंटे से अधिक का इंतजार करना पड़ा। वहां मौजूद लोगों ने माना कि भीड़ नहीं होने के बावजूद गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार सोनोग्राफी सेंटर निर्धारित समय यानी दोपहर 2 बजे से पहले ही बंद हो रहा है। ऐसे में इलाज या जांच के लिए आने वाली महिलाओं को निजी सेंटरों में जाना पड़ रहा है। मोहल्लों में काम करने वाली महिला स्वास्थ्य वर्कर यह शिकायत कलेक्टर तक से कर चुकी हैं, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं।

एसएनयू में 15 हजार बच्चे सालभर में ही हुए भर्ती
प्रदेश में नवजात शिशुओं की गहन देखभाल के लिए स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट यानी एसएनयू की संख्या 26 हो गई है। कोरोना काल में 2020 से 2021 के वर्ष में जन्म के तुरंत बाद 15,257 बच्चों को स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में भर्ती होने की जरूरत पड़ी। कोरोना के दौरान एक्सपर्ट का मानना है कि गर्भवती महिलाओं के पॉजिटिव होने पर इस तरह की गहन चिकित्सा की आवश्यकता नवजात बच्चों को हो सकती है। प्रदेश में जिला स्तर पर सभी जगह एनएनयू यूनिट में 10-10 से अधिक बिस्तर बढ़ाने के लिए निर्देश पहले से ही जारी किए गए हैं।

 

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