कोणार्क के सूर्य मंदिर की यात्रा के सफर कहानी

 

 

 

प्राचीन समय की इमारतें  हमारी अनमोल धरोहर है। इनसे हमें उस जमाने की समृद्ध और सुंदर वास्तुकला का पता चलता है। ओडिशा के सागर तट पर स्थित कोणार्क का सूर्य मंदिर ऐसी ही एक सुंदर प्राचीन इमारत है।इसे

 

 

 

देखने प्रतिदिन देश-विदेश से सैकड़ों सैलानी आते हैं कोणार्क पुरी से लगभग 35 किलोमीटर तथा भुवनेश्वर से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर है वहां जाने के लिए रेलगाड़ी से पुरी या भुवनेश्वर पहुंचना होता है जहां से बस या टैक्सी द्वारा कोणार्क जाया जा सकता है। हां हवाई जहाज से जाना हो तो देश के अलग-अलग भाग से भुवनेश्वर तक की उड़ानें उपलब्ध हैं हम भी इस बार कोणार्क की यात्रा पर निकल पड़े और पुरी पहुंच गए पुरी से हम कोणार्क के के लिए चले तो हमें रास्ते में बहुत अच्छा लगा यह पूरा रास्ता समुद्र के किनारे किनारे बसा है।

 

समुद्री हवाओं के संग लहराते नारियल के पेड़ पूरे रास्ते नजर आते रहे उनके पीछे कई बार विशाल सागर भी नजर आ जाता था कोणार्क का सूर्य मंदिर समुद्र तट से थोड़ी दूरी पर है इसका निर्माण तेरहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में राजा नरसिंह देव ने करवाया था यह मंदिर 1200 शिल्पकारों के कला कौशल से 12 वर्षों में बनकर तैयार हुआ था कोणार्क का अर्थ है सूर्य का कोण इस मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार किया गया है कि सूर्योदय की किरणें सर्वप्रथम मंदिर के पूर्वी भाग में प्रवेश द्वार पर पड़ती हैं

 

कोणार्क पहुंचकर पता चला कि बंगाल की खाड़ी के समुद्री मार्ग से जाने वाले यूरोपीय जातियों को भी है विशाल मंदिर अपनी तरफ खींचता था उन्होंने इसे ब्लैक पैगोडा का नाम दिया था सूर्य मंदिर के निकट पहुंचते ही हम इस मंदिर का विशाल रूप देखकर चकित रह गए यह मंदिर 24 पहियों वाले रथ के आकार में बनाएं जिस पर सूर्य देवता विराजमान है यह हमारे समय चक्र को दर्शाते हैं इसकी बनावट इस प्रकार की गई है किइनकी तीलियों पर पड़ने वाली छाया से हम दिन का समय बता सकते हैं इस प्रकार यह धूप घड़ी का काम करते हैं मंदिर के प्रवेश द्वार पर सीड़ियों के दोनों और हमें शेरों के 2 प्रतिमाएं देखें जिन्होंने हाथियों को दबोच रखा था

 

मंदिर की दीवारों पर कहीं देवी देवताओं की मूर्तियां बनी थी तो कहीं नाचती हुए अफसराओ की मूर्तियां बनी थीं। हमें पता चला कि कोणार्क के सूर्य मंदिर का एक भाग 16 वीं 17 वीं शताब्दी में समुद्री हवाओं के झोंकों की चपेट में आकर गिर चुका है हमने देखा कि बचे हुए हिस्से की तीनों दीवारों पर सूर्य भगवान की मनमोहक मूर्तियां बनी थी मंदिर के चारों ओर हरा-भरा सुंदर उद्यान था मंदिर के निकट एक पुरातत्व संग्रहालय का मंदिर के सामने एक छोटा सा बाजार था जहां से हमने उड़ीसा के हस्तशिल्प की सुंदर वस्तुएं खरीदी भारत के सात आश्चर्य में कोणार्क के सूर्य मंदिर की गिनती होती है इतना ही नहीं यूनेस्को ने इसे सन् 1984 में विश्व धरोहर में शामिल कर लिया है वहां की यादों को समेट कर हम लौट चलें।

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