कैसे ले सकते हैं बैंक में लॉकर? इसके साथ ही मिल जाता है आपको ये अधिकार

बैंक की कई सर्विस ऑनलाइन कर दी गई हैं यानी अब आप बैंक के कई काम घर बैठे अपने फोन या कम्प्यूटर के माध्यम कर सकते हैं. लेकिन, कुछ सुविधाओं के लिए आपको बैंक में जाना जरूरी है, जिसमें से एक है बैंक लॉकर सुविधा. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से बैंक लॉकर की सर्विस एक बार फिर खबरों में आ गई है. ऐसे में आप हम बैंक की इस सर्विस के बारे में जानते हैं कि आखिर किस तरह इसका फायदा उठा जा सकता है और इससे जुड़े नियम क्या है.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया है, जिसके बाद से लोगों का बैंक लॉकर की ओर रुझान बढ़ रहा है. दरअसल, कोर्ट ने कहा है कि बैंक ग्राहक को लिखित में जानकारी दिए बगैर लॉकर नहीं तोड़ सकते. बैंक लॉकर में रखी चीजों को नुकसान होने पर भी अपनी जिम्मेदारी से भी पल्ला नहीं झाड़ सकते. सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक को लॉकर में रखी चीजों को नुकसान के मामले में बैंकों के जिम्मेदारी तय करने के लिए जरूरी नियम बनाने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की ओर से ग्राहकों के हित में दिए गए फैसले से कई ग्राहक खुश हैं.

क्या होता है बैंक लॉकर?

कई बैंक ब्रांच में बैंक लॉकर की सुविधा दी जाती है, जिसमें आप अपने कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज रख सकते हैं. दरअसल, बैंक में कई लॉकर बने होते हैं और उसमें से एक लॉकर आपको अलॉट कर दिया जाता है. इसके बाद आप अपने महत्वपूर्ण सामान उसमें रख सकते हैं और चाहे जब इसमें निकाल सकते हैं. यह एक तरह की आलमारी होती है, जो बैंक ब्रांच के परिसर में होती है और कड़ी सुरक्षा में रहती है. अगर

कैसे खुलवाएं बैंक लॉकर?

बैंक लॉकर खुलवाने के आपको बैंक में एक एप्लीकेशन देनी होती है, जिसके बाद आपको ये सुविधा दी जाती है. इसमें आपको एक रेंट के रुप में बैंक को इसके चार्ज देने होते हैं और लॉकर लेते वक्त बैंक और आपके बीच एक कॉन्ट्रेक्ट होता है, जो रेंट एग्रीमेंट की तरह ही है. लॉकर पर लगने वाला रेंट हर बैंक, उसकी ब्रांच, साइज आदि पर निर्भर करता है. इसके लिए बैंक खाते में एक मिनिमम अमाउंट भी होना आवश्यक है और अकाउंट से सालाना किराया लिया जाता है.

क्या होती हैं शर्तें?

बैंक लॉकर को एक से ज्यादा लोग चला सकते हैं. वहीं लॉकर धारक की मौत होने पर उसके नॉमिनी आवश्यक खानापूर्ति के बाद लॉकर का सामान दे दिया जाता है. इसकी दो चाबी दी जाती है, जिसमें एक बैंक के पास होती है और एक ग्राहक के पास होती है. चाबी खोने पर दूसरी चाबी बना ली जाती है, लेकिन इसके लिए बैंक को फीस देनी होती है. साथ ही आप लॉकर खुलवाने के प्रोसेस की तरह इसे बंद भी करवा सकते हैं.

साथ ही लॉकर में बैंक की ओर से कई शर्ते भी ग्राहक के सामने रखी जाती हैं. इसके अनुसार, बैंक लॉकर में रखे सामान को लेकर उत्तरदायी नहीं होता है और कई परिस्थितियों में बैंक की लॉकर के संदर्भ जिम्मेदारी नहीं होती है. इस पर ही सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि बैंक को लॉकर को लेकर कुछ जिम्मेदारी लेनी चाहिए. हालांकि, लॉकर में कई मायनों में आपका सामान काफी सुरक्षित भी रहता है.

Check Also

गुजरात से लापता हुए CG में मिले:राजगढ़ से गायब हुए सोमा भाई ढाई साल बाद 1300 किमी दूर सुकमा में मिले; CCTNS पोर्टल से पुलिस ने ढूंढा पता

  छत्तीसगढ़ की सुकमा पुलिस ने ढाई साल से लापता सोम भाई सोलंकी को उनके …