कृषि कानूनों का विरोध:जींद में मायूस किसान ने दो एकड़ गेहूं की फसल पर चलाया ट्रैक्टर; टिकैत बोले- मैंने ऐसा नहीं कहा, अभी ऐसा न करें

जींद जिले के गुलकनी गांव निवासी राममेहर ट्रैक्टर से अपनी गेहूं की फसल को नष्ट करता हुआ। - Dainik Bhaskar

जींद जिले के गुलकनी गांव निवासी राममेहर ट्रैक्टर से अपनी गेहूं की फसल को नष्ट करता हुआ।

दिल्ली की सरहद पर धरने के 88वें दिन रविवार को किसानों ने आंदोलन तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, जींद जिले के गुलकनी गांव के किसान राममेहर ने दो एकड़ गेहूं की फसल को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दिया। इसकी वजह उन्होंने किसान नेता राकेश टिकैत के आह्वान को बताया है।

टिकैत ने कहा था कि सरकार यह नहीं समझे कि किसान कटाई करने चले जाएंगे और आंदोलन खत्म हो जाएगा। जरूरत हुई तो किसान एक फसल जलाने को भी तैयार हैं। उनके ऐसा कहने के बाद 10 एकड़ के मालिक राम मेहर ने रविवार को यह कदम उठाया।

किसान ने कहा- टिकैत कहेंगे तो खाने के लिए दाना छोड़ बाकी फसल भी नष्ट कर दूंगा

राममेहर ने बताया कि अभी मैंने 2 एकड़ फसल नष्ट की है। टिकैत कहेंगे तो खाने के लिए दाने छोड़कर बाकी फसल भी नष्ट कर देंगे। ऐसी ही एक घटना यूपी में भी सामने आई है। ऐसे में अब टिकैत ने कहा, ‘किसानों से ऐसा करने के लिए नहीं कहा था। मैं अपील करता हूं कि किसान ऐसा न करें। मैंने कहा था कि अगर फसल कटाई के कारण सरकार आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश करती है तो हम एक फसल त्यागने के लिए तैयार हैं। उस समय क्या करना है और कैसे करना वह बताया जाएगा, तब तक कोई किसान इस तरह फसल नष्ट न करे।’

महापंचायतों पर विवाद
मोर्चा की मीटिंग में मुद्दा उठा कि बार-बार मना करने के बावजूद मोर्चे के कुछ सदस्य हरियाणा व पंजाब में महापंचायतें कर रहे हैं। प्रेसवार्ता में भी इस बारे में सवाल पूछा गया कि जब मोर्चा मना कर चुका है तो उसके बाद भी रविवार को पंजाब में बलबीर राजेवाल, और हरियाणा में गुरनाम चढ़ूनी ने कार्यक्रम किस आधार पर किए। इस पर किसान नेताओं ने कहा कि हम पहले हरियाणा-पंजाब में महापंचायत नहीं करने की अपील कर चुके हैं और जो लोग कर रहे हैं, उनसे हम कहेंगे कि ऐसा न करें।

‘किसानों से ऐसा करने के लिए नहीं कहा था। मैं अपील करता हूं कि किसान ऐसा न करें। मैंने कहा था कि अगर फसल कटाई के कारण सरकार आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश करती है तो हम एक फसल त्यागने के लिए तैयार हैं। उस समय क्या करना है और कैसे करना वह बताया जाएगा, तब तक कोई किसान इस तरह फसल नष्ट न करे।’

वार्ता को हमेशा तैयार

ध्यान रहे दिल्ली की सरहद पर धरने के 88वें दिन रविवार को किसानों ने आंदोलन तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए 11 दिन बाद रविवार को कुंडली बॉर्डर पर संयुक्त मोर्चा की बैठक हुई, जिसमें चार बड़े निर्णय हुए। अब 28 फरवरी को आंदोलन के तीसरे चरण का ऐलान होगा। वार्ता पर गतिरोध के सवाल पर किसान नेताओं ने एक सुर में कहा कि हम वार्ता को हमेशा तैयार हैं। हम सड़क पर बैठे हैं और सरकार कुर्सी पर बैठकर देश चला रही है। इसलिए सरकार को प्रस्ताव भेजना चाहिए।

 

Check Also

बीजापुर:ऑपरेशन से पहले मरीज का कोरोना का टेस्ट पॉजिटिव

बीजापुर/जगदलपुर : जिले में कोरोना का कोई मामला नही था,लेकिन एक मामला तब सामने आया …