किसानों को घर बैठे मिलेगी मंडियों की पल-पल की जानकारी, आधुनिक प्रणाली विकसित कर रही सरकार

मंडियों से लेकर खेती की हर जानकारी अब अपने गांवों में बैठे किसानों को मिल सकती है। इसके लिए सरकार एक आधुनिक नई प्रणाली विकसित कर रही है। सरकार के पास कृषि क्षेत्र से जुड़े किसानों और उनके खेत तक बड़ा डाटा बेस तैयार हो चुका है। आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस सिस्टम के उपयोग से किसानों की जरूरत की हर संभव जानकारी उसे समुचित समय में पहुंचाई जाएगी। कृषि क्षेत्र में सुधार के साथ व्यापक बदलाव किए गए हैं। मंत्रालय के पास पीएम-किसान योजना के तहत दस करोड़ किसानों का डाटा बेस तैयार कर लिया गया है। स्वायल हेल्थ कार्ड और भूमि दस्तावेजों के रिकार्ड भी बना लिए गए हैं। इससे किसानों की जरूरतों और संसाधनों के उपयोग का ध्यान रखा जा सकेगा।

कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने बताया ‘देश की विभिन्न मंडियों में कृषि उत्पादों के ताजा मूल्यों की जानकारी किसानों को हर उनके मोबाइल फोन पर सुबह आठ बजे तक पहुंचा दी जाएगी।’

कृषि सुधारों के तहत मंडियों के बाहर जिंसों की खरीद करने वालों पर भी केंद्रीय कानून लागू होगा, जिसमें किसानों के साथ किसी भी तरह की ठगी अथवा बेईमानी करना आसान नहीं होगा। पांच जून से लागू कानून के तहत अब तक कई राज्यों में इस तरह की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई हुई और किसानों को इसका लाभ मिला है। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने बताया कि कृषि क्षेत्र में कानूनी सुधार के साथ निजी निवेश का रास्ता आसान कर दिया गया है।

 

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की रफ्तार 25 फीसद करने का लक्ष्य है। ब्राजील, इंडोनेशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में विकास दर 50 फीसद तक है। कृषि उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने की सख्त जरूरत है, जिसमें कानूनी सुधार काफी कारगर साबित होंगे। किसानों को नई तकनीक के उपयोग के साथ फसल बिक्री का विकल्प देने के लिए ई-ट्रेडिंग प्लेटफार्म का प्रावधान किया गया है। कृषि उपज के मूल्यों का जानकारी के लिए संस्थागत बंदोबस्त सरकार करेगी, जिससे किसान हर समय बाजार से जुड़ा रहेगा।

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