कार्रवाई:चमकीले पाउडर को यूरेनियम बता तीन करोड़ में बेचने आए कानपुर के चार बदमाश गिरफ्तार

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  • इंदौर में किसी लैब से जुड़े शख्स को देने वाले थे पदार्थ, जांच के लिए सागर भेजा

एटॉमिक एनर्जी के लिए प्रयोग किया जाने वाले रेडियो एक्टिव पदार्थ की तस्करी करने वाले कानपूर के चार युवकों को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गिरफ्तार किया है।

इनके कब्जे से दो ग्राम चमकीला पाउडर मिला है, जिसे ये यूरेनियम बताकर 2 से 3 करोड़ में इंदौर में किसी लैब से जुड़े शख्स को बेचने आए थे। कांच की बॉटल और प्लास्टिक की थैली में पैक इस मैटल पाउडर को एसटीएफ ने जांच के लिए सागर लैब भेजा है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा कि ये वाकई यूरेनियम है या कुछ और।

एसटीएफ टीआई एमए सैयद ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी कानपुर के शम्मी (22) पिता चंद्रप्रकाश राजपूत, योगेशचंद्र (35) पिता नरेंद्र कुमार शुक्ला, उसका भाई सीमू शुक्ला (32) और कमल कुमार (32) पिता हीरालाल वर्मा हैं।

चारों आरोपी बस से कानपुर पहुंचे और माणिकबाग ब्रिज के नीचे डिलीवरी देने वाले थे। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। इनके चार मोबाइल भी जब्त किए हैं। इंदौर पुलिस ने कानपुर पुलिस से आरोपियों की जानकारी जुटाई तो पता चला गिरोह का सरगना शम्मी राजपूत है। यह रेडियोएक्टिव पदार्थों की तस्करी के नाम पर कई लोगों से धोखाधड़ी कर चुका है।

इसने कुछ समय पूर्व गुजरात के एक व्यापारी को प्लेटिनम धातु का पाउडर बेचने के नाम पर 5 लाख रुपये की ठगी की थी। एसटीएफ टीआई श्रीकांत जोशी ने बताया कि यूरनेनियम जैसे रेडियोएक्टिव पदार्थ का उपयोग लैब में इन्वेंशन के लिए, कैंसर के ट्रीटमेंट, सब्जियों को लंबे तक ताजा रखने के लिए किया जाता है। इस तरह के पदार्थों में अल्फा बीटा और गामा किरणें उत्सर्जित होती हैं।

गामा किरण सबसे ज्यादा हार्मफुल होती है। इन्हें मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन में ना लिया जाए तो जानलेवा भी हो सकती है। इस तरह के प्रोडक्ट का उपयोग हाईप्रोफाइल फोटोग्राफी के लिए एलईडी प्लेट्स तैयार करने और एक्सप्लोजन व फ्यूजन के लिए भी किया जाता रहा है। इंदौर में इन आरोपियों की लिंक का भी पता कर रहे हैं।

 

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