कानपुर सड़क हादसा:तीन जवान बेटों की लाश देख मां बेहोश, बदहवासी में बोला पिता- मेरा तो संसार ही चला गया, कैसे उठाऊंगा 3 बेटों की अर्थी

 

कानपुर हादसे में 17 की मौत हो गई। जवान बेटों की लाश देख पिता धनीराम बदहवास हो गए। - Dainik Bhaskar

कानपुर हादसे में 17 की मौत हो गई। जवान बेटों की लाश देख पिता धनीराम बदहवास हो गए।

उत्तर प्रदेश के किसान नगर में हाईवे पर एसी बस और टेम्पो में भिड़ंत में एक ही गांव के 17 लोगों को असमय मौत हो गई। 4 किमी. की दूरी बचाने के लिए हुई एक गलती दर्दनाक हादसे में बदल गई। हादसे की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। गांव में मातम पसर गया, घरों में आने वाली खुशियों ने बेरूखी कर दी। इस हादसे में सबसे ज्यादा पीड़ा पिता धनीराम और उनके परिवार को उठानी पड़ी। 5 बेटों में 3 की असमय मौत हो गई। अपने 20, 22 और 24 साल के बेटों की लाश देखकर पिता और मां बेहोश हो गए।

बदहवाश पिता डॉक्टरों से चिल्ला-चिल्लाकर कहते रहे मेरी जान ले लो, मेरे बेटों को जिंदा कर दो। मुझे कंधा देने के लिए एक कंधा ज्यादा था, लेकिन अपने 3 बेटों की अर्थी मेरे कंधे कैसे उठाएंगे। बता दें, बीती मंगलवार देर रात बड़ा हादसा हो गया है। किसान नगर में हाईवे पर एसी बस और टेम्पो में भिड़ंत में 17 लोगों की मौत हुई, जबकि 30 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। इनमें 10 की हालत गंभीर है।

बेटे की जुलाई में थी शादी
पिता धनीराम ने बताया कि घर में इतनी आमदनी नहीं थी तो मेरे तीनों बेटे राममिलन (24), शिवचरन (22) और लवलेश (20) कमाने लगे। राममिलन की शादी बिनगवां निवासी नीतू से तय की थी। गोदभराई हो गई थी। जुलाई में शादी करनी थी। लेकिन क्या पता था, ये हो जाएगा। घर में आने वाली बहू के लिए शादी की खरीदारी भी राममिलन खुद ही कर रहा था।

2 बेटों की मौत से बिखर गया परिवार
धर्मराज यादव (28 साल) और गौरव (22 साल) की खबर सुनकर पिता त्रिभुवन बेसुध हो गए हैं। बस एक ही रट लगाकर कहते हैं कि मेरे बेटों को वापस ले आओ, वो फैक्ट्री गया है। 2 बेटों की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। घर में कोई कमाने वाला भी नहीं बचा। घर के चाचा ने बताया कि लड़कों ने कमाना शुरू किया था। लॉकडाउन में काम न मिलने से घर के सुधरे हालात फिर से खराब हो गए थे। कोरोना कर्फ्य हटा तो फैक्ट्री में तेजी से फिर काम शुरू हुआ। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

7 महीने पहले कमाना शुरू किया
इसी हादसे में एक और पिता ने अपने जिगर के टुकड़े को खो दिया। 21 साल के शिवचरण ने 6 से 7 महीने पहले ही पढ़ाई पूरी कर कमाना शुरू किया था। पिता कमलेश ने बताया कि काम नहीं मिला तो 280 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बिस्कुट फैक्ट्री में काम करने लगा। कहता था कि कोरोना खत्म हो जाएगा तो बाहर कमाने जाऊंगा। टूटे घर को बनाएगा।

कन्यादान से पहले पिता की मौत
हादसे में मरने वालों में करन (45) भी शामिल है। उसके 17 साल के बेटे विवेक ने बताया कि 2 बहनों की शादी होनी है। एक बहन काजल की शादी पिता ने तय की थी। 4 जून को शादी होनी थी, लेकिन लड़के के भाई की एक्सीडेंट हो गया तो शादी आगे बढ़ा दी गई। क्या मालूम था कि कन्यादान करने वाले हाथों का साया ही सिर से उठ जाएगा। बहन की शादी अब कैसे होगी। घर में पिता ही अकेले कमाने वाले थे।

बेटा हॉस्पिटल में भर्ती और पिता की हो गई मौत
इस हादसे ने प्रत्येक परिवार को लाखों दुख एक साथ दे डाले। एक और परिवार को अकेला कमाने वाला चला गया। मृतक उदय नारायण 55 वर्षीय के भाई लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उदय की 4 बेटियां और 1 बेटा है। 2 बेटियों की शादी हो गई और 2 बेटियों की शादी कोरोना के चलते नहीं कर सके। एक बेटी की गोदभराई और बरीक्षा हो चुकी है। एक लड़का कुलदीप हॉस्पिटल में बीमार पड़ा और हॉस्पिटल में एडमिट है। अब बच्चों की मां सावित्री के कंधों पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई है।

नहीं पहचान में आए शव
अपनों को खो चुके परिजन वैसे ही बदहवाश थे। उनकी बॉडी को देखकर बेहोश ही हो गए। हादसा इस कदर भीषण था कि ज्यादातर की हेड इंजरी थी और सिर का हिस्सा लगभग खत्म हो गया था। उनके परिवारीजनों ने बाकी बॉडी को देखकर अपनों की पहचान की। ज्यादातर की बॉडी इस कदर क्षत-विक्षत थी कि उनके ऊपर नाम, पता लिखकर पर्ची लगाई गई।

 

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