कर्ज में डूबी जिस कंपनी को खरीद रहे हैं मुकेश अंबानी के समधी, उसमें 6182 करोड़ की धोखाधड़ी का हुआ खुलासा

देश के सबसे अमीर शख्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के मालिक मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के समधी अजय पिरामल 84,000 करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी डीएचएफएल (DHFL) को खरीदेंगे. डीएचएफएल के अधिग्रहण को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से भी मंजूरी मिल गई है. अधिग्रहण की मंजूरी मिलने के बाद डीएचएफएल मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. ट्रांजैक्शन ऑडिटर ग्रांट थॉर्नटन ने डीएचएफएल (DHFL) के प्रशासक के साथ साझा की गई एक रिपोर्ट में कुछ ऐसे लेनदेन पाए हैं, जो धोखाधड़ी वाले देने वाले हैं. इसमें 6,182 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है.

दीवान हाउसिंग फाइनेंस कंपनी लिमिटेड ((DHFL) के प्रशासक ने लेनदेन के संबंध में कंपनी के मामलों की जांच करने के लिए प्रतिष्ठित पेशेवर एजेंसी ग्रांट थॉर्नटन से सहायता प्राप्त की. इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 की धारा 43 से 51 और 65 एवं 66 के तहत लेनदेन को मंजूरी प्रदान की गई थी.

बता दें कि दीवान हाउसिंग फाइनेंस कंपनी लिमिटेड के प्रशासक को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत कर्तव्यों को पूरा करने के लिए नियुक्त किया गया है. इसके मुताबिक, कंपनी के प्रशासक ने लेन-देन लेखा परीक्षक के रूप में नियुक्त पेशेवर एजेंसी से एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्राप्त की, जिसमें संकेत दिया गया है कि कुछ लेनदेन ऐसे हैं जो प्रकृति में अघोषित, धोखाधड़ी वाले और तरजीही हैं.

34,250 करोड़ में DHFL का अधिग्रहण करेगी पिरामल ग्रुप

पिरामल ग्रुप को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 34,250 करोड़ में DHFL के अधिग्रहण की मंजूरी मिली है. इस डील को DHFL के कर्जदाताओं की समिति (COC) से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. सीओसी ने पिरामल ग्रुप की कंपनी पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की समाधान योजना को पिछले महीने मंजूरी दी थी. बता दें कि पिरामल ग्रुप के मालिक अजय पिरामल, देश के सबसे अमीर शख्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के मालिक मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के समधी हैं.

6,182 करोड़ रुपए के लेन-देन का खुलासा

ट्रांजैक्शन ऑडिटर की जांच और समीक्षा के आधार पर प्रशासक ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ के समक्ष धारा 45, धारा 60 (5) और धारा 66 के तहत 20 फरवरी को एक आवेदन दायर किया है.

आवेदन में प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, संबंधित लेन-देन का मौद्रिक प्रभाव लगभग 6,182.11 करोड़ रुपये है. इन कार्यवाही से संबंधित सभी प्रासंगिक विवरणों को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, मुंबई के समक्ष दायर आवेदन में शामिल किया गया है और वर्तमान में विचाराधीन है.

DHFL पर 83,873 करोड़ रुपए का था बकाया

जुलाई 2019 में DHFL पर बैंकों का 83,873 करोड़ रुपए का बकाया था. इसमें 10,083 करोड़ रुपए का सबसे बड़ा बकाया भारतीय स्टेट बैंक का है. मार्च 2020 में कंपनी की परिसम्पत्तियां (Assets) 79,800 करोड़ रुपए थी. इसमें से 63 प्रतिशत एनपीए हो चुकी थीं.

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