कभी वीडियो पार्लर चलाया करती थीं शशिकला, जयललिता से ऐसे हुई मुलाकात और फिर यूं बन बैठींं तमिलनाडु की चिनम्मा

Sasikala Quits Politics: तमिलनाडु की दिवगंत मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी और AIADMK से बर्खास्त नेता वीके शशिकला ने बुधवार की शाम एक बार फिर अपने फैसले से सबको चौंका दिया है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी. इसी के साथ उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति में उनसे जुड़ी तमाम संभावनाओं और कयासों पर विराम लगा दिया.

कभी तमिलनाडु की राजनीति में जयललिता के बाद शशिकला का नाम आता था. मुख्यमंत्री के पद पर जयललिता थीं, लेकिन पर्दे के पीछे से उनके हर राजनीतिक और रणनीतिक फैसलों में ​शशिकला की राय शामिल हुआ करती थी. इसी साल जनवरी में वह जेल की सजा काटकर रिहा हुई थीं. भ्रष्टाचार और आय से ​अधिक संपत्ति के मामले में कोर्ट ने उन्हें 4 साल जेल की सजा सुनाई थी. वह बेंगलुरु जेल में बंद थीं और उनके रिहा होते ही तमिलनाडु में सियासी कयासों का दौर जारी था. हालांकि उन्होंने तमाम शंका-आशंकाओं पर पूर्णविराम लगा दिया.

शशिकला कोई आम महिला नहीं हैं. उनके जीवन के कई हिस्से आम लोगों को चौंकाते हैं. वह 90 का दौर था, जब तमिलनाडु की एक मामूली महिला प्रदेश की राजनीति में कद रखने वालीं जयललिता से मिलीं. उनके करीब हुईं और होती चली गईं. इतनी करीब कि जयललिता के बाद उन्हीं का नाम आता था.

वीडियो पार्लर चलाने वाली शशिकला की जयललिता से पहली मु​लाकात

करीब तीन दशक पहले एक वीडियो पार्लर चलाने वाली शशिकला लंबे समय तक पूर्व सीएम दिवंगत जयललिता के बराबर ही ताकतवर मानी जाती रही. उन्होंने अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक सामान्य औसत गृहिणी की तरह रहने वालीं शशिकला वर्ष 1984 में विनोद वीडियो विजन नाम से चेन्नई के अलवरपेट में वीडियो पार्लर चलाया करती थीं.

उनके पति तत्कालीन नटराजन सरकार में जनसंपर्क अधिकारी थे और उस वक्त कड्डलुर जिले आईएएस अफसर चंद्रलेखा कलक्टर थीं. चंद्रलेखा की पैरवी से ही ‘विनोद वीडियो’ की टीम को जयललिता के संबोधन वाली एक मीटिंग की वीडियोग्राफी का मौका मिला. इसी दौरान शशिकला पहली बार जयललिता से मिली थीं. एक सामान्य सी यह मुलाकात ने शशिकला के आगे के जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख देने वाली साबित हुई.

एमजीआर के निधन के बाद जयललिता के और करीब हो गईं शशिकला

वर्ष 1956 में संयुक्त तंजौर जिले के तिरुतुरईपुंडी में विवेकानंदन और कृष्णावेणी के जन्मीं शशिकला ने केवल 10वीं तक पढ़ाई की है. 16 अक्टूबर 1973 को एम नटराजन से उनकी शादी हुई. जयललिता से मुलाकात के बाद शशिकला धीरे-धीरे उनकी विश्वासपात्र बनती चली गईं. जयललिता उन दिनों राज्यसभा सदस्य थीं. वर्ष 1988 से जयललिता का आवास पोएस गार्ड शशिकला का स्थाई निवास बन चुका था.

मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन के निधन के बाद शशिकला, जयललिता के बेहद करीब हो गईं. एमजीआर के निधन के बाद बाद अन्नाद्रमुक दो हिस्सों में बंट चुकी थी. फरवरी, 1988 में जयललिता के गुट ने मीटिंग बुलाई, जिसमें शशिकला के विश्वासपात्र लोग पार्टी पदाधिकारी बनाए गए.

वह दौर, जब जयललिता को अम्मा और शशिकला को चिनम्मा कहा जाने लगा

1991 में जब जयललिता पहली बार मुख्यमंत्री बनीं तो अपने हर फैसले के लिए शशिकला से सलाह लिया करती थीं. यह वही दौर था, जब लोग जयललिता को अम्मा और शशिकला को चिनम्मा कहने लगे थे. शशिकला, जयललिता का साया बन चुकी थीं. जयललिता ने शादी तो की नहीं थी. ऐसे में शशिकला के पति, भाइयों का पार्टी में दबदबा बढ़ता चला गया.

शशिकला के ही एक रिश्तेदार वीएन सुधाकरन को जयललिता ने अपना दत्तक पुत्र बना लिया. उसकी शादी इतने धूमधम से करवाई कि इसकी गिनती दुनिया की सबसे खर्चीली शादियों में होने लगीं और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गई.

3 महीने की दूरी और फिर आखिरी सांस तक का साथ

1996 में हुए चुनाव में जयलिलता हार गईं. इसके पीछे शशिकला के रिश्तेदारों और उनके करीबियों का रवैया भी कारण माना गया. जयललिता को शशिकला के साथ जेल भी जाना पड़ा. दोनों के बीच दूरियां बढ़ी, लेकिन टिकी नहीं. शशिकला का फिर से जयललिता के पोएस गार्डन हाउस में आना-जाना शुरू हो गया. बहरहाल, वर्ष 2011 में एक बार फिर जयललिता सीएम बनीं.

इस दौरान जयललिता को आशंका हुई कि शशिकला उनके खिलाफ साजिश रच रही हैं. 19 दिसंबर 2011 को शशिकला और उनके रिश्तेदारों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. एक बार फिर शशिकला पोएस गार्डन से बाहर निकाल दी गईं. लेकिन यह सब भी लंबा नहीं चला.

तीन महीने ही बीते होंगे कि 28 मार्च, 2012 को शशिकला ने एक प्रेस रिलीज जारी किया. इसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी में रहने या फिर सांसद, विधायक बनने में कोई दिलचस्पी नहीं हैं. वह तो केवल जयललिता की सच्ची बहन बनी रहना चाहती हैं. इसके तीसरे ​ही दिन 31 मार्च को जयललिता ने शशिकला को पार्टी में एंट्री दी और फिर इसके बाद तो जयललिता की आखिरी सांस तक दोनों की दोस्ती रही.

बहरहाल जेल से सजा काटकर लौटने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि शशिकला के लौटने से तमिलनाडु की राजनीति में कुछ अलग ही सियासी मोड़ आएंगे, लेकिन उन्होंने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी. जयललिता को याद करते हुए उन्होंने AIADMK के कार्यकर्ताओं से चुनाव में स्टालिन की पार्टी DMK को हराने के लिए एकजुट होकर मेहनत करने की अपील की है.

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