कब है निर्जला एकादशी व्रत, जानें व्रत करने का यह कठोर नियम

 हिंदू धर्म में साल के सभी एकादशी व्रत में से निर्जला एकादशी व्रत को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है. निर्जला एकादशी व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. इस व्रत में एक बूंद जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है. इसमें व्रतधारी व्रत शुरू करने से लेकर व्रत के पारण के समय तक एक बूंद भी जल ग्रहण नहीं करता है. हिंदू धर्म शास्त्रों में कहा जाता है कि मनुष्य को अपने जीवन में निर्जला एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए. इसे करने से मोक्ष की प्राप्ति तो होती ही है. साथ ही लोगों की मनोकामना भी पूरी होती है. इस व्रत में भी भगवान विष्णु का विधि-विधान से पूजन किया जाता है.

निर्जला एकादशी व्रत के नियम

चूंकि यह व्रत बहुत ही कठिन है, इस लिए यहां पर इस कठिन व्रत को करने के नियम दिए जा रहे हैं, जिनका पालन करना जरुरी है. अगर आप इस व्रत को पहली बार करने जा रहे हैं तब तो यह नियम जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.

निर्जला एकादशी व्रत जैसा कि नाम से ही ज्ञात होता है कि निर्जल यानी बिना जल ग्रहण किए ही व्रत रखना. निर्जला एकादशी व्रत शुरू करने से लेकर व्रत पारण करने तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जानी चाहिए. एकादशी तिथि का प्रारंभ 20 जून 2021 को शाम 4:21 बजे से ही शुरू हो जाएगी जिसका समापन 21 जून दोपहर 01:31 बजे होगा. ऐसे में व्रत रखने वाले को चाहिए कि वे 20 जून से चावल खाना बंद कर दें. किसी प्रकार का ब्यसन न करें. मीट मदिरा आदि का सेवन किसी भी कीमत पर न करें. सामान्य एवं सात्विक भोजन ही लें.

21 जून को बिना जल ग्रहण किये हुए पूरा दिन व्रत रखें और भगवान विष्णु का ध्यान करते रहें.अगले दिन यानी 22 जून को व्रत का पारण करने के बाद ही जल ग्रहण करें. गरीब और जरूरतमंद ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद ही सात्विक भोजन करें. इस दिन भी चावल न खाएं.

एकादशी तिथि 20 जून को शाम 04:21 बजे से ही शुरू हो जाएगी जिसका समापन होगा 21 जून दोपहर 01:31 बजे. इसलिए निर्जला एकादशी व्रत 21 जून को ही किया जाएगा. व्रत का पारण अगले दिन यानी कि 22 जून को होगा.

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