एशिया में पहली बार ऑपरेशन के समय लगा ट्रांसप्लांटेड हाथों का रंग बदला, डॉक्टर मान रहे चमत्कार

साल 2016 में महाराष्ट्र के पुणे शहर की रहने वाली 21 साल की श्रेया सिद्दनागौदर ने अपने दोनों हाथ गवा दिए थे। 2017 में उनका इंटर-जेंडर हैंड ट्रांसप्लांट कोच्चि के अमृता इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (AIIMS) में साउथ इंडियन युवक के हाथ लगाए गए थे। उस समय युवक के हाथ का रंग बिल्कुल श्रेया के बॉडी कलर से अलग था।

दैनिक भास्कर के अनुसार, श्रेया ने बताया कि, “मुझे नहीं पता हाथों की स्किन टोन कैसे बदल गई। पहले मुझे अपने हाथ अपने नहीं लगते थे। इसे लेकर मैं चिंतित भी रही, लेकिन अब लगता है। यह मेरे ही हैं। मुझे केरल के रहने वाले एक लड़के की मौत के बाद उसके हाथ लगाए गए थे। हालांकि, पहले मैंने प्रोथेस्टिक हाथों का इस्तेमाल करने की कोशिश भी थी, लेकिन बाद में सर्जरी कराना ही तय किया था। ऑपरेशन के बाद हाथों का रंग पूरे शरीर के जैसा नहीं था।”

हाथ के रंग में बदलाव को लेकर सर्जरी टीम का हिस्सा रहे प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर मोहित शर्मा का कहना है कि इंटर-जेंडर हैंड ट्रांसप्लांट पर अधिक शोध नहीं हुआ है लेकिन अनुमान है कि लड़की में हार्मोन बदलाव की वजह से ऐसा संभव हो पाया है। मोहित शर्मा ने बताया कि दुनिया में करीब 200 से ज्यादा हाथों के ट्रांसप्लांट हुए लेकिन किसी मामले में हाथों के रंग में बदलाव का कोई मामला सामने नहीं आया।

वही प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट के चीफ डॉक्टर सुब्रमन्या अय्यर ने पत्रकारों को बताया कि, “हम साइंटिफिक जर्नल में हाथ ट्रांसप्लांट के दो मामले पब्लिश करना चाहते हैं। हमने अभी श्रेया के हाथों के रंग में बदलाव को रिकॉर्ड किया है, लेकिन अंगुलियों और हाथ की बनावट में बदलाव को समझने के लिए थोड़ा और शोध करना होगा। शोध के प्रकाशन में अभी समय लगेगा।”

Check Also

मोबाइल से कैसे WIFI पासवर्ड हैक

मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप और इंटरनेट हमारी आज की सबसे ज्यादा जरुरत की चीज़ बन गई है। अगर …