Sunday , July 21 2019
Home / वायरल न्यूज़ / इसका मुखिया खाता भारत में और सोता म्यांमार में,भारत का सबसे अनोखा गांव…

इसका मुखिया खाता भारत में और सोता म्यांमार में,भारत का सबसे अनोखा गांव…

आज हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिसका मालिक कहता भारत का है, लेकिन वह सोने के लिए म्यांमार जाता है. गांव का नाम लोंगवा है , जिसका आधा हिस्सा भारत में और आधा म्यांमार में है. इस गांव की एक खास बात यह भी है कि सदियों से यहां रहने वाले लोगों के बीच दुश्मन का सिर काटने की परंपरा चल रही थी, जिस पर 1940 में प्रतिबंध लगाया गया था.

लोंगवा नागालैंड के मोन जिले में घने जंगलों के बीच म्यांमार सीमा से सटा हुआ भारत का आखिरी गांव है और यहां कोंयाक आदिवासी रहते हैं और इन्हें बेहद ही खूंखार भी माना जाता है. वहीं अपने कबीले की सत्ता और जमीन पर कब्जे के लिए वे अक्सर पड़ोस के गांवों से लड़ाईयां लड़ते हैं. जानकारी के माने तो साल 1940 से पहले कोंयाक आदिवासी अपने कबीले और उसकी जमीन पर कब्जे के लिए अन्य लोगों के सिर काट देते थे. वहीं कोयांक आदिवासियों को हेड हंटर्स भी कहा जाता है और इन आदिवासियों के ज्यादातर गांव पहाड़ी की चोटी पर ही होते थे, ताकि वे दुश्मनों पर आसानी से नजर रख सकें. लेकिन 1940 में ही हेड हंटिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था साथ ही माना जाता है कि 1969 के बाद हेड हंटिंग की घटना इन आदिवासियों के गांव में नहीं हुई है.

दूसरी ओर यह भी कहा जाता है कि इस गांव को दो हिस्सों में कैसे बांटा जाए, इस सवाल का जवाब नहीं सूझने पर अधिकारियों द्वारा यह तय किया कि सीमा रेखा गांव के बीचों-बीच से जाएगी, लेकिन कोंयाक पर इसका कोई असर नहीं पड़ना चाहिए. बॉर्डर के पिलर पर एक तरफ बर्मीज में (म्यांमार की भाषा) और दूसरी तरफ हिंदी में संदेश नजर आता है. खबर यह भी है कि कोयांक आदिवासियों में मुखिया प्रथा चलती है और यह मुखिया कई गांवों का प्रमुख भी होता है और उन्हें एक से ज्यादा पत्नियां रखने की छूट भी है. फिलहाल जो यहां का मुखिया है, उसकी 60 बीवियां हैं. जबकि भारत और हमारे पड़ोसी देश म्यांमार की सीमा इस गांव के मुखिया के घर के बीच से होकर निकलती है और इसलिए यह कहा जाता है कि यहां का मुखिया खाना भारत में खाता है और सोता म्यांमार में है.

Loading...

Check Also

‘फ्री ऑटो एंबुलेंस’ चलाते हैं ये 76 वर्षीय सरदारजी सड़क हादसों में घायल लोगो के लिए

किसी की जान बचाने से बड़ी सेवा कुछ नहीं हो सकती हैं. हालाँकि कई बार ...