इमरान का श्रीलंका दौरा:भारत ने इमरान को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की मंजूरी दी; 2 साल पहले मोदी को PAK के आसमान से गुजरने की इजाजत नहीं मिली थी

 

एक हफ्ते पहले जब इमरान के श्रीलंका दौरे का शेड्यूल तय किया गया था, इसमें संसद में भाषण का कार्यक्रम था। बाद में इसे रद्द कर दिया गया। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

एक हफ्ते पहले जब इमरान के श्रीलंका दौरे का शेड्यूल तय किया गया था, इसमें संसद में भाषण का कार्यक्रम था। बाद में इसे रद्द कर दिया गया। (फाइल फोटो)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान आज दो दिन के श्रीलंका दौरे पर जा रहे हैं। भारत ने इसके लिए पाकिस्तान एयरफोर्स के प्लेन को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि 2019 में जब नरेंद्र मोदी अमेरिका और सऊदी अरब दौरे पर गए थे, तब पाकिस्तान ने भारतीय प्रधानमंत्री के एयरक्राफ्ट को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी थी।

इंटरनेशनल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के रूल्स के मुताबिक, VVIP फ्लाइट्स को एयरस्पेस के इस्तेमाल की मंजूरी देनी होती है। पाकिस्तान ने इसका उल्लंघन किया था। भारत ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया है।

दौरे से पहले इमरान को झटका

इमरान खान मंगलवार को दो दिन के दौरे पर श्रीलंका पहुंच रहे हैं। हालांकि, इस दौरे के पहले ही उन्हें गोटबाया राजपक्षे की सरकार ने बहुत बड़ा कूटनीतिक झटका दिया। इमरान अब श्रीलंकाई संसद को संबोधित नहीं कर पाएंगे। माना जा रहा है कि राजपक्षे ने यह कदम भारत की नाराजगी से बचने के लिए उठाया है। एक हफ्ते पहले जब इमरान के श्रीलंका दौरे का शेड्यूल तय किया गया था, इसमें संसद में भाषण का कार्यक्रम था। बाद में राजपक्षे सरकार को लगा कि इमरान कश्मीर का जिक्र कर सकते हैं, लिहाजा स्पीच को शेड्यूल से ही हटा दिया गया।

कोलंबो के अखबार में आर्टिकल
सोमवार को श्रीलंका के अखबार ‘कोलंबो गैजेट’ में पाकिस्तान के एक्सपर्ट डार जावेद का आर्टिकल पब्लिश हुआ। इसमें डार ने लिखा- बहुत साफ बात यह है कि श्रीलंका भारत की नाराजगी का जोखिम नहीं ले सकता। वह पहले ही चीन के कर्ज में उलझा है और भारत वैक्सीन समेत हर मोर्चे पर उसकी मदद कर रहा है। हाल ही में भारत ने पांच लाख वैक्सीन श्रीलंका भेजे थे। वैसे भी यहां मुस्लिमों को लेकर बौद्ध समुदाय में नाराजगी रही है।

इमरान ने तालिबान का समर्थन किया था
जावेद के मुताबिक- 2012 में इमरान ने तालिबान का समर्थन करते हुए कहा था कि वो एक पवित्र युद्ध लड़ रहा है और इस्लाम में यह जायज है। यूनाइटेड नेशंस में उन्होंने मुस्लिमों का मुद्दा उठाया। अक्टूबर 2020 में जब फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने कट्टरपंथियों और अपने देश में आतंकी हमलों पर सख्त रुख अपनाया तो इमरान ने मैक्रों के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ बयान दिए। श्रीलंका सरकार को आशंका थी कि इमरान उनकी संसद का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए कर सकते हैं।

राजपक्षे की मजबूरी
डार जावेद आगे लिखते हैं- श्रीलंका में गोटबाया राजपक्षे राष्ट्रपति और महिंदा राजपक्षे प्रधानमंत्री हैं। दोनों भाई हैं और बौद्ध समुदाय से आते हैं। वे जानते हैं कि अगर इमरान ने संसद में भाषण के दौरान इस्लामिक मामले उठाए तो श्रीलंका में भी इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। हाल ही में इमरान ने श्रीलंका में मुस्लिमों के हालात पर शिकायती लहजा दिखाया था।

श्रीलंका के एक मुस्लिम नेता राशिद बाथिउद्दीन ने पाकिस्तान सरकार से मदद मांगी थी। उनका आरोप था कि कोविड-19 से मारे जा रहे मुस्लिमों को दफनाने की बजाए जलाया जा रहा है। इमरान ने सार्वजनिक तौर पर यह मुद्दा उठाया था।

अपना घर नहीं देखते इमरान
जावेद आगे लिखते हैं- इमरान को दूसरे मुल्कों में मुस्लिमों की हालत खराब लगती है, लेकिन हाल ही में UN की एक रिपोर्ट में कहा गया था पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बेहद परेशान हैं। इमरान इस पर कुछ नहीं बोलते। कश्मीर मुद्दे पर वे मुस्लिम देशों को ही एकजुट नहीं कर पाए। कोई देश इस मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा होने को तैयार नहीं है।

 

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