इन पांच वजहों से अटक सकता है स्वास्थ्य बीमा का क्लेम

महंगे इलाज के चलते स्वास्थ्य बीमा की अहमियत आज के समय में बढ़ गई है। स्वास्थ्य बीमा से न सिर्फ जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होता है बल्कि आप बिना पैसे की चिंता करे अच्छा इलाज करा सकते हैं। हालांकि, कुछ गलतियों या जानकारी नहीं होने की वजह से आपका स्वास्थ्य बीमा का दावा रद्द हो सकता है। इंश्योरेंस लेने से पहले यह जानना भी अहम हो जाता है कि ऐसे कौन से कारण हैं, जिससे इंश्योरेंस क्लेम को बीमा कंपनी द्वारा नामंजूर किया जा सकता है। हम आपको पांच वजह बता रहे हैं, जिसके चलते आपका दावा रद्द हो सकता है।

1. महंगा रूम रेंट

अगर आपने किसी कंपनी से स्वास्थ्य बीमा ले रखा है। उस कंपनी की पॉलिसी के तहत आपको अस्पताल में भर्ती होने पर 3000 रुपये तक का रूम लेने की सुविधा मिली है, लेकिन अगर आप 4000 रुपये का रूम लेंगे तो दावा निपटान के समय बीमा कंपनी इस रकम का भुगतान नहीं करेगी। आपका दावा रद्द कर कम रकम का भुगतान करेगी। आपको अतिरिक्त खर्च को खुद भुगतान करना होगा।

2. इलाज का ज्यादा चार्ज

कोरोना के इस संकट के समय कई निजी अस्पताल काफी अधिक चार्ज कर रहे हैं। ऐसे में अगर किसी अस्पताल में इलाज कराते हैं वह आपसे काफी अधिक चार्ज करता है तो बीमा कंपनी दावा देने से मना कर सकती है। बीमा कंपनी जनरल इंश्योरेंस काउसिंल द्वारा निर्धारित दर से ही भुगतान करेगी। इस स्थिति में आपका दावा रद्द हो सकता है या तय रकम के बाद खुद भुगतान करना होगा।

3. अस्पताल में 24 घंटे के लिए भर्ती

अधिकांश स्वास्थ्य बीमा में इलाज का खर्च अस्पताल में 24 घंटे के लिए भर्ती होने के बाद ही उठाया जाता है। अगर, आप कोरोना से संक्रमित है और घर पर ही आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे हैं तो बीमा कंपनी दावा देने से मना कर सकती है। हालांकि, कुछ बीमा पॉलिसी में घर से इलाज पर भी दावा का भुगतान करने की सुविधा दी जाती है।

4. प्रतीक्षा अवधि से पहले दावा

आमतौर पर स्वास्थ्य बीमा में दो से चाल का प्रतीक्षा अवधि पहले से चली आ रही बीमारी के इलाज के लिए तय होता है। यानी, आप दो या चार साल बाद ही पहले से चली आ रही बीमारी का इलाज कराने पर खर्च का दावा कर सकते हैं। कोरोना पॉलिसी में भी 15 दिन की प्रतीक्षा अवधि है। अगर इससे पहले आप दावा करते हैं तो बीमा कंपनी आपके दावे को रद्द कर देगी।

5. सही जानकारी नहीं देना

स्वास्थ्य बीमा का दावा खारिज होने का सबसे बड़ा कारण होता है बीमाधारक से गलत जानकारी देना। अगर आपको पहले से कोई बीमारी है या परिवार में कोई बीमारी पीढिय़ों से चली आ रही है तो स्वास्थ्य बीमा खरीदते वक्त उसकी जानकारी देना जरूरी है। उसकी जानकारी मिलने से बीमा कंपनी समझ जाती है कि आपके स्वास्थ्य के साथ कितना जोखिम है और उसकी मदद से वह सही प्रीमियम तय करती है।

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