इन्द्रेश कुमार ने मुसहरों को रामनाम के मंत्र से किया दीक्षित,दिया गुरूमंत्र

वाराणसी,25 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य और रामपंथ के संस्थापक इन्द्रेश कुमार ने मंगलवार को लमही स्थित श्रीराम आश्रम में समाज के अंतिम व्यक्तियों को रामनाम का मंत्र दिया। विधिवत पूजा पाठ के साथ इंद्रेश कुमार ने 25 मुसहर और 5 आदिवासियों को दीक्षित कर गुरुमंत्र दिया। आचार्य पंडित श्रीराम तिवारी ने वैदिक मंत्रों के साथ सभी दीक्षा लेने वाले राम प्रेमियों से हवन कराया, तिलक लगाया और गंगा जल से आचमन कराने के बाद गुरुमंत्र लेने के लिए संकल्पित कराया। इसके बाद इन्द्रेश कुमार ने सभी मुसहर समाज के लोगों के गले में तुलसी की कंठी डाली, रामनामी यंत्र दिया और कान में राम नाम का गुरुमंत्र दिया। गुरु मंत्र लेने के बाद सभी रामपंथियों के चेहरे खिल उठे। चेहरे पर गर्व और सम्मान के भाव थे। सभी को राम काज के विस्तार की जिम्मेदारी दी गयी। सभी रामपंथियों ने काशी विश्वनाथ मंदिर और अयोध्या में श्रीराम मंदिर का दर्शन करने का शपथ लिया। रामपंथ के पंथाचार्य डाॅ. राजीव ने गुरुमंत्र लेने वाले सभी रामपंथियों को रामनाम का लॉकेट दिया। आदिवासी समाज के द्वारिका प्रसाद खरवार को रामाचार्य के रूप में दीक्षित किया गया।

इस दौरान इंद्रेश कुमार ने कहा कि अब भगवान श्रीराम के साथ धर्म की स्थापना करने वाले उनके साथियों के वंशजों को राम काज करने की जिम्मेदारी देकर सर्वोच्च समान दिया गया। अब ये न अछूत हैं और न ही उपेक्षित। इनके सम्मान से ही भारतीय संस्कृति का सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अब राम संस्कृति के विस्तार की जिम्मेदारी भगवान श्रीराम के साथियों के वंशजों के कंधे पर है, जिन्हें हम आज मुसहर और आदिवासी कहते हैं। रामपंथ ने सनातन धर्म को व्यावहारिक रूप से समावेशी बनाने के लिये सूत्र दिया ‘सबके राम, सबमें राम’। रामपंथ ने तय किया कि देशभर में राम संस्कृति का विस्तार, पारिवारिक एकता जातियों में समरसता की भावना विकसित करने हेतु गांव–गांव में श्रीराम परिवार का मंदिर बनाया जायेगा। जहां भगवान श्रीराम–माता जानकी, भगवान भरत–माता माण्डवी, भगवान लक्ष्मण–माता उर्मिला, भगवान शत्रुघ्न–माता श्रुतकीर्ति एवं संकट मोचन हनुमान जी की मूर्ति स्थापित होगी। 9 अंक भक्ति, शक्ति, ग्रहों का होता है। इस मंदिर से भारतीय संस्कृति और पारिवारिक एकता स्थापित होगी।

ये हुए दीक्षित

दीक्षित होने वालों में तुलाराम खरवार, बबई खरवार, राजमन खरवार, श्रवण कुमार सिंह गोंड, जौनपुर के किशन, दूधनाथ, प्रियंका, सुधेसरा, भिरगू, अनिल, बृजलाल, रामआसरे, मंगल, सुनील, दिनेश, अखिलेश, शिवपूजन, कल्याण, कन्हैया, जितेन्द्र, चन्द्रावती, दुर्गावती, जिलेदार, नन्दलाल, सरिता, सीमा, अमरावती, सोनी, उषा बिन्द्रा, लखनऊ से ठाकुर राजा रईस, काशी से राजेश कुमार पाण्डेय रहे। दीक्षा संस्कार कार्यक्रम का संयोजन जौनपुर के प्रमुख समाजसेवी दिनेश चौधरी ने किया। संचालन अर्चना भारतवंशी ने किया।

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