आईजी ने कहा- घाव साफ करने में काम आने वाले स्प्रिट में पानी मिला देते, उसी को शराब बताकर बेचते थे आरोपी, स्प्रिट ज्यादा होने से मौतें होने की आशंका

 

आरोपी सिकंदर अभी फरार है, उसे निगमायुक्त ने बर्खास्त कर दिया है।

  • गृह विभाग के सचिव राजेश राजौरा समेत एसआईटी की टीम ने क्षेत्रों का दौरा कर जानकारी जुटाई
  • बुधवार और गुरुवार को जहरीली शराब से 14 माैत हुई, एसआईटी ने परिजन और गवाहों से बात की

उज्जैन में जहरीली शराब से 36 घंटे में 14 लोगों की मौत के मामले में एसआईटी जांच कर रही है। शुक्रवार सुबह टीम नगर निगम के पुराने दफ्तर यानी रीगल टॉकीज भवन पहुुंची। टीम ने छत्री चौक, खाराकुआं थाना, महाकाल थाना और विभिन्न रैन बसेरों में जाकर मौके का मुआयना किया। एसआईटी की टीम कंट्रोल रूम पर गवाहों और मृतक परिजन से भी मिली।

गवाही देने आए एक व्यक्ति ने बताया कि आरोपी सिकंदर और गब्बर ने कुछ दिन पहले ही 500 रुपए खर्च कर झिंझर शराब बनाना सीखा था। वहीं, आईजी राकेश गुप्ता ने भी कहा कि गिरफ्त में आए एक आरोपी ने कबूला है कि उसने 20 से 25 दिन पहले ही झिंझर बनाना सीखा था। संभवत: इसे बनाते समय फाॅर्मेशन गड़बड़ा गया होगा। यह बात अभी वह कह रहा है लेकिन अभी अन्य आरोपियों से पूछताछ होनी है। उसके बाद ही यह निष्कर्ष निकाल पाएंगे।

वहीं, मजदूरों का पोस्टमॉर्टम करने वाले डाॅक्टर का कहना है कि इसे पीने से व्यक्ति पागल हो सकता है। या फिर उसकी आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

फरार निगमकर्मी आरोपी गब्बर को भी नौकरी से हटा दिया गया है।

फरार निगमकर्मी आरोपी गब्बर को भी नौकरी से हटा दिया गया है।

गवाहों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह अवैध शराब का धंधा क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा था। आरोपी पहले हैंड बैग में रखकर शराब छतरी चौक पार्क पर बेचने लाते थे। इसके बाद वे झोले में शराब भरकर लाने लगे। ये निगम की पार्किंग के ऊपर और पिंजारवाड़ी क्षेत्र में शराब बनाया करते थे। पिंजारवाड़ी में तो ये स्टोव की मदद से झिंझर तैयार करते थे।

इसी प्रकार की प्लास्टिक की पोटली बनाकर झिंझर बेचते थे।

इसी प्रकार की प्लास्टिक की पोटली बनाकर झिंझर बेचते थे।

गवाहों की मानें तो सिकंदर और गब्बर पहले कहावाड़ी क्षेत्र से लाकर शराब की सप्लाई करते थे। इसके बाद इन्होंने धीरे से खुद ही इसे बनाना सीखने की कोशिश की। कुछ दिन पहले ही इन्होंने 500 रुपए खर्च कर इसे बनाने की विधि सीखी थी। शायद झिंझर बनाने के दौरान इनसे कुछ चूक हुई हो। दोनों आरोपी अभी फरार हैं। इसी बात की पुष्टि उनके गिरफ्त में आने के बाद ही होगी।

उधर, शुक्रवार को जहां निगमायुक्त ने आरोपी सिकंदर और गब्बर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। वहीं, मामले में आबकारी के भी दो अधिकारियों पर गाज गिरी। आबकारी उप निरीक्षक सुनीता मालवीय और आबकारी आरक्षक रोहित लोहारिया को निलंबित कर दिया गया है।

टीम को मिली मौके से स्प्रिट की यह बोतल।

टीम को मिली मौके से स्प्रिट की यह बोतल।

आईजी बोले – शराब नहीं, घाव साफ करने वाला स्प्रिट है
मामले में आईजी राकेश गुप्ता से बात की गई तो उनका कहना था कि यह कोई शराब नहीं है, बल्कि स्प्रिट में पानी मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। यह वही स्प्रिट है, जो घाव साफ करने के लिए अस्पतालों में उपयोग में लाया जाता है। प्रारंभिक पीएम रिपोर्ट में जहरीले पदार्थ से मौत की बात सामने आई है।

एसआईटी ने परिजनों और गवाहों से बात की।

एसआईटी ने परिजनों और गवाहों से बात की।

शरीर के अंगों को करती है डैमेज: डॉक्टर

जहरीली शराब से मृत शवाें का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. जितेंद्र शर्मा ने बताया कि मानव शरीर के 9 प्रमुख तंत्र हैं। ऐसी शराब लीवर, किडनी, दिमाग और भोजन तंत्र को पूरी तरह डैमेज कर देती है।

 

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