आंदोलन के 88 दिन:किसान संयुक्त मोर्चा की 11 दिन बाद आज होगी बैठक, आंदोलन के तीसरे चरण का ऐलान संभव

  • कुंडली बॉर्डर पर पंजाब के संगठनों की बैठक में उठा मोर्चे की बैठक न होने का मुद्दा
  • सरकार पर दबाव को ले सकते हैं बड़ी कॉल, वार्ता के लिए पहल करने पर भी होगा मंथन

कुछ दिन से सुस्त पड़ रहे आंदोलन में तेजी लाने के लिए किसान नेताओं ने फिर से तैयारी शुरू कर दी है। शनिवार को कुंडली बॉर्डर पर पंजाब के संगठनों की बैठक हुई। इसमें संयुक्त मोर्चा की बैठक नहीं होने का मुद्दा भी उठा। इसके बाद सूचना आई कि 11 दिन के अंतराल के बाद 21 फरवरी को दोपहर 1:00 बजे मोर्चा की बैठक होगी।

मोर्चा की बैठक में किसान नेता सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन के तीसरे चरण का ऐलान कर सकते हैं। सरकार के साथ वार्ता की पहल करने पर भी मंथन हो सकता है। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने हिंसा के मामले में शनिवार को 20 और आरोपियों के फोटो जारी किए हैं।

महापंचायत और पर्दे के पीछे की रणनीति

  • आंदोलन का पहला चरण बॉर्डर पर बैठना और दूसरा राज्यों में किसान महापंचायतों का था।
  • आंदोलन के 3 माह पूरे होने की तारीख के आसपास मोर्चा तीसरे चरण का ऐलान कर सकता है।
  • महापंचायतों से जो माहौल तैयार हुआ है, तीसरे चरण में उसका असर दिखाने वाला ऐलान होगा।
  • पिछले कुछ दिनों में पर्दे के पीछे मोर्चा को छोटे भागों में बांटकर रणनीति तैयार की जा रही थी।
  • विभिन्न संगठनों ने यह भी चर्चा की है कि वार्ता का दौर फिर शुरू होने पर कितना आगे बढ़ना है।

अब तो करिए

किसान आंदोलन के 88 दिन हो गए हैं। सरकार-किसानों के बीच 12 दौर चली वार्ता भी अनिर्णय के मुहाने पर अटक गई। 28 दिन से वार्ता बंद है। न सरकार झुक रही है, न किसान नेता। 22 जनवरी को हुई अंतिम वार्ता के बाद दिल्ली हिंसा, आंदोलन स्थल पर बिजली-पानी काटना और बॉर्डर पर कीलें लगाने जैसी बातों से बात बिगड़ती गई। 3 माह से बॉर्डर पर डटे किसानों को घर भेजने के लिए कोई न कोई समाधान जरूरी है, जो वार्ता से ही निकलेगा।

सियासी ‘खेल’ में उलझी चाल; न किसान हल की ओर ना सरकार, 88 दिन से जहां थे वहीं खड़े

हम तो प्रस्ताव दे चुके हैं: सरकार

हमें मिलने और बात करने में कोई आपत्ति नहीं। हम प्रस्ताव दे चुके हैं, किसानों के जवाब का इंतजार है। उसी आधार पर वार्ता होगी। –नरेंद्र तोमर, केंद्रीय कृषि मंत्री

हम तो प्रस्ताव रद्द कर चुके: किसान

सरकार का प्रस्ताव दो बार रद्द कर चुके हैं। नया प्रस्ताव आता है तो हम वार्ता को तैयार। वार्ता की पहल करने पर मोर्चे की बैठक में चर्चा करेंगे। -दर्शनपाल, किसान नेता

 

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