आंदोलन का 88वां दिन:सर्दी सिर से गुजरी, अब तपिश झेलने की तैयारी शुरू, झोपड़ियों में बदलने लगे तंबू

 

रेवाड़ी | किसान झोपड़ी बनाने में जुटे हैं। खेड़ा बॉर्डर पर 4 तंबुओं को झोपड़ियों में बदला जा चुका है। बाकी के लिए काम चल रहा है। मोर्चे पर डटे हनुमानगढ़ के किसान लालाराम ने कहा कि आसमान से बरसती आग की तपिश को ठंडा करने में झोपड़ी कारगर है। इसके आगे कूलर भी फेल हैं। - Dainik Bhaskar

रेवाड़ी | किसान झोपड़ी बनाने में जुटे हैं। खेड़ा बॉर्डर पर 4 तंबुओं को झोपड़ियों में बदला जा चुका है। बाकी के लिए काम चल रहा है। मोर्चे पर डटे हनुमानगढ़ के किसान लालाराम ने कहा कि आसमान से बरसती आग की तपिश को ठंडा करने में झोपड़ी कारगर है। इसके आगे कूलर भी फेल हैं।

  • कुंडली, टिकरी और खेड़ा बॉर्डर से पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट
  • एडवांस बुकिंग: मार्च के पहले सप्ताह में आंदोलन स्थल पर पहुंच जाएंगे कूलर और पंखे

कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। पूरी सर्दी सिर से गुजर चुकी है। अब किसानों ने बदलते मौसम की रणनीति तैयार कर ली है।

कुंडली, टिकरी और खेड़ा बॉर्डर पर गर्मी की दस्तक के साथ ही हाईवे के बीच में गाड़े तंबुओं ने झोपड़ियों का आकार लेना शुरू कर दिया है। किसान संगठन पंखे व कूलरों की एडवांस बुकिंग कर चुके हैं। मार्च के पहले सप्ताह में आंदोलन स्थलों पर बड़े पंखे व कूलर पहुंचने शुरू हो जाएंगे।

कुंडली में पानी की खपत बढ़ने से आसपास के आरओ प्लांट से संपर्क किया है। आंतिल खाप 12 के प्रधान जयभगवान आंतिल, बाल्याण खाप के दर्शन सिंह बाल्याण ने कहा कि किसानों के पास तमाम व्यवस्था है। किसान के पास बड़े फर्राटा पंखे हैं, जिनसे फसल बरसाते हैं। उन पंखों को आंदोलन में लाया जाएगा। ट्राॅलियों को मच्छरदानी से कवर किया जाएगा।

टिकरी बॉर्डर पर किसान गुरुचरण सिंह ने बताया कि 24 घंटे पेयजल की व्यवस्था है। किसानों के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया है। रेवाड़ी के खेड़ा बॉर्डर पर झोपड़ियां बनाने के लिए राजस्थान से झूंडों की पूलियां (फूस) मंगाई जा रही हैं।

हौसलों की कारीगरी, तीन माह से डटे किसान बोले- अगली सर्दी-गर्मी भी यहीं निकालेंगे

खेड़ा में घटी संख्या को माना

बोले- शादी-ब्याह और लामणी के चलते कई टेंट खाली हैं

खेड़ा बॉर्डर पर मोर्चा राजस्थान की सीमा में एक किलोमीटर से ज्यादा में फैल गया था। अभी भी टेंट तो उतनी ही दूरी पर लगे हैं, मगर आंदोलनकारियों की संख्या घट गई है। कई टेंट तो अब खाली हो चुके हैं। किसान कहते हैं कि कइयों को बच्चों और रिश्तेदारी में शादी-ब्याह तो किसी को लावणी के चलते जाना पड़ रहा है। 10-15 दिन के रोटेशन में लोग आ-जा रहे हैं।

सभा का संचालन कर रहे डॉ. संजय माधव का कहना है कि अगली गर्मी-सर्दी भी यहीं गुजारने को तैयार हैं। सरकार हमारी तैयारी देखकर हौसले समझ ले, हमारी लड़ाई लंबी है। 27 फरवरी तक राजस्थान में किसान सभाएं होंगी। यहां भी अपने हाथों से जितनी व्यवस्थाएं कर पाएंगे करेंगे।

हरियाणा के तीनों बॉर्डरों पर पानी की मांग बढ़ी, लगवाए आरओ वाटर कूलर

खेड़ा बॉर्डर : पानी की पूर्ति के लिए जनसहयोग से अब आरओ प्लांट लग चुका है। वाटर कूलर भी लगाने की तैयारी हो गई है। नागौर के धनसुखराम कहते हैं कि 12 महीने गर्मी, सर्दी, बरसात में खेतों में काम कर मिट्‌टी में सो जाने वालों को सुविधाओं की परवाह नहीं है। सरकार से केवल कानून रद्द करने की मांग करते हैं।

टिकरी बॉर्डर : किसान गुरुचरण सिंह ने बताया कि पेयजल का कोई संकट नहीं है। अब 24 घंटे तक पानी की व्यवस्था के लिए ट्रीटमेंट वाटर प्लांट भी लगाया गया है। एक मार्च के बाद मौसम में परिवर्तन होने के बाद फ्रिज, कूलर की भी व्यवस्था होगी। किसान लंबे खिंच रहे आंदोलन के अनुसार तैयारी कर रहे हैं।

कुंडली बॉर्डर : पंजाब के गुरदासपुर के किसान राज मान ने कहा कि किसान जब पंजाब से दिल्ली के लिए चला था तो उसे पता था कि आंदोलन ज्यादा लंबा चलेगा। इसलिए किसान हर मौसम के लिए पहले से अलर्ट है। कूलर-पंखे मार्च के पहले सप्ताह में पहुंच जाएंगे। किसान मौसम के सामने घुटने नहीं टेकेगा।

 

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