अस्थियां विसर्जित करने से भी हिचक रहे लाेग, संगठन आ रहे आगे

 

फाइल फोटो।

  • संक्रमण के डर से अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो रहे परिवार के लोग

इसे लाेगाें के अंदर काेराेना का खाैफ ही कहा जाएगा कि लाेग अब अपनाें का अंंतिम संस्कार करने से भी हिचक रहे हैं। यही नहीं अंतिम संस्कार करने के बाद अस्थियां विसर्जित करने काे भी आगे नहीं आ रहे हैं। काेराेना संक्रमित कुछ मृतकाें की सामाजिक संगठनाें के लाेगाें ने हरिद्वार जाकर अस्थियां विसर्जित कीं। नगर निगम ओर नगर पालिका के कर्मचारी भी काेराेना संक्रमित का अंतिम संस्कार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

ऐसे कई मामले हैं जब अंतिम समय में अपने नहीं आए

केस-1 हिसार में 10 दिन पूर्व ही काेराेना संक्रमित एक वृद्ध की माैत हाे गई। माैत के बाद शव काे हिसार के ऋषि नगर श्मशान घाट मे ले जाया गया। बताया गया कि काेराेना के डर से परिजन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। परमिशन लेने के बाद नगर पालिका कर्मचारी संघ इकाई हिसार के कर्मचारियाें ने शव का अंतिम संस्कार किया।

केस-2 हिसार के श्मशान घाट में दाे काेराेना संक्रमिताें की अस्थियां पिछले कई दिन से रखीं थीं। परिजनाें ने अस्थियां विसर्जित करना मुनासिब नहीं समझा। जिस पर सामाजिक संगठन से जुड़े लाेगाेंं ने अन्य लाेगाें की अस्थियाें के साथ ही काेराेना संक्रमिताें की अस्थियां भी हरिद्वार में जाकर विसर्जित कीं।

डरें नहीं-मुखाग्नि के बाद संक्रमण का खतरा नहीं

हिसार के रेलवे अस्पताल के प्रभारी डॉ. धीरज कुमार का कहना है कि लोगों को अस्थियां विसर्जित करने से नहीं हिचकना चाहिए। शव को मुखाग्नि के बाद अंदर के कीटाणु पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं। वैसे भी कोरोना 50 डिग्री सेंटीग्रेट से नीचे के तापमान वाले शरीर में होने की संभावना होती है। जबकि मुखाग्नि में कही ज्यादा तापमान होता है। शरीर के साथ संक्रमण भी खत्म हो जाता है। जिसके कारण अस्थियां में कोरोना का सवाल ही पैदा नहीं होता है। इस डरें बिना अपनों की अंतिम क्रिया संपन्न कराएं।

 

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