अमेरिका / मां ने बेटी की माैत के एक साल बाद सुनी उसके दिल की धड़कन, कहा-खुश हूं, बेटी किसी की जिंदगी बनी

न्यूयॉर्क. एम्मी हैमलिन ने बेटी एलिडिया की अचानक माैत के बाद उसकी बॉडी डोनेट करने का फैसला किया ताकि किसी और के शरीर में उनकी बेटी का दिल धड़क सके। पिछले साल ब्रूकलिन कोनरमैन के हार्ट ट्रांसप्लांट ऑप्रेशन के दौरान एलिडिया का दिल ब्रूकलिन के शरीर में लगा जिससे उसे एक नई जिंदगी मिली। 16 साल की ब्रूकलिन को जन्म से ही हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम था जिस कारण उसके दिल का बायां हिस्सा विकसित नहीं हो पाया था और हार्ट ट्रांसप्लांट ही इसका एकमात्र इलाज था।

एलिडिया की माैत के 10 दिन बाद ब्रूकलिन की सर्जरी हुई और दिसंबर में उसकी मां एंजेला ने एम्मी को ढूंढकर उनका शुक्रिया अदा किया। इस महीने की शुरुआत में ब्रूकलिन ने एम्मी से मुलाकात की जिसमें उन्हाेंने अपनी बेटी के दिल की धड़कन ब्रूकलिन के शरीर में सुनी।

ब्रूकलिन से मिलकर लगा जैसे एलिडिया से मिल रही हूं
ब्रूकलिन की मां एंजेला ने बताया, जब हमें पता चला कि ब्रूकलिन के ऑप्रेशन के लिए दिल मिल गया है तो हम खुश भी और दुखी भी क्याेंकि एक ओर जहां हमारी बेटी को जिंदगी मिल रही थी वहीं दूसरी ओर किसी और कि जिंदगी खत्म भी हुई थी। ब्रूकलिन का ऑप्रेशन सफल हुआ और उसके बाद मैंने उन लोगाें को ढूंढने का फैसला किया जिनकी वजह से ऐसा संभव हो पाया। आखिरकार दिसंबर में फेसबुक पर एक फंडरेजिंग पेज के जरिए मुझे एम्मी का पता मिला और मैंने उन्हें खत लिखकर उनका शुक्रिया अदा किया। इस महीने के शुरू में दोनाें परिवाराें की मुलाकात हुई जिसमें एम्मी ने ब्रूकलिन के दिल की धड़कन सुनी।

ऑपरेशन के बाद अस्पताल में ब्रूकलिन।

ब्रूकलिन को म्यूजिक सुनना पसंद है जैसा एलिडिया को था
एम्मी का इस बारे में कहना है, मुझे तो ब्रूकलिन से मिलना ही था क्याेंकि मैं जानना चाहती थी कि मेरी बेटी के दिल के कारण किसी की जिंदगी में कितना बदलाव लाया है। मुझे ब्रूकलिन ने दिल की धड़कनाें से पेंट की हुई ड्रमस्टिक्स तोहफे में दीं जिसने मुझे काफी चीजें याद दिला दीं। उसे भी म्यूजिक सुनना काफी पसंद है, बिल्कुल वैसे जैसे मेरी एलिडिया को था। शायद इसी कारण उसे मिलकर मुझे एक पल के लिए भी ऐसा नहीं रहा था कि मैं एलिडिया के साथ नहीं हूं बल्कि मैं तो यही महसूस कर रही थी कि मैं एलिडिया से ही मिल रही हूं।

अस्पताल में ब्रूकलिन।

‘ब्रूकलिन को पाकर लगा एलिडिया के साथ हूं’
सेंट लुइस की एम्मी कहती हैं, मेरी बेटी एलिडिया हेल्दी टीनेजर थी, हमेशा खुश रहने वाली लेकिन कहीं न कहीं वह डिप्रेशन से गुजर रही थी जिस कारण उसने अपनी जान ले ली। वह दिन मैं कभी भूल नहीं पाउंगी जब डॉक्टराें ने मुझे उसके इस दुनिया से जाने की खबर दी थी। उसने मैथ्स को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया था। मैंथ्स में उसे दिक्कत थी लेकिन इतनी ज्यादा रही होगी कि वह अपनी जान ले ले, इसका मुझे अंदाजा नहीं था। उसकी माैत का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन था मगर इसके बावजूद मैंने उसके अंग दान करने का फैसला किया। एलिडिया का दिल इंडियाना की ब्रूकलिन के शरीर में लगा जिसके जन्म से लेकर अब तक छह ऑप्रेशन हो चुके थे और उसे हार्ट ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी जो एलिडिया के दिल से पूरी हुई। मैं खुश हूं कि मेरी बेटी मरने के बाद भी किसी के लिए जिंदगी बन गई।

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