अमेरिका-पाकिस्तान में ठनी:CIA चीफ का गुपचुप इस्लामाबाद दौरा, PAK विदेश मंत्री बोले- एयरबेस देने का सवाल ही नहीं; सच्चाई कुछ और

 

अमेरिका पाकिस्तान से एयर और मिलिट्री बेस इसलिए चाहता है ताकि वो यहां से अफगानिस्तान पर नजर रख सके। (फाइल) - Dainik Bhaskar

अमेरिका पाकिस्तान से एयर और मिलिट्री बेस इसलिए चाहता है ताकि वो यहां से अफगानिस्तान पर नजर रख सके। (फाइल)

अमेरिकी फौज 11 सितंबर तक अफगानिस्तान से निकल जाएगी। इसके पहले वो तालिबान और अलकायदा पर नजर रखने के लिए रणनीति तैयार कर रही है। अमेरिका कोशिश कर रहा है कि उसे पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर एयर या मिलिट्री बेस मिल जाएं, ताकि वो यहां से आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले कर सके। ऊपरी तौर पर पाकिस्तान इससे इनकार कर रहा है। पाकिस्तानी मीडिया में खबरें हैं कि पिछले दिनों CIA चीफ एक बेहद सीक्रेट विजिट पर पाकिस्तान आए थे। हालांकि, पाकिस्तानी फौज और सरकार इस मामले पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है।

वैसे, सच्चाई कुछ और है। दरअसल, पाकिस्तान ने 2001 में अमेरिका से एक समझौता किया था। इसके तहत अमेरिकी फौज पाकिस्तान के एयरबेस और एयरस्पेस इस्तेमाल कर सकती है। यानी पुराना समझौता रद्द नहीं किया गया, बल्कि इमरान सरकार सिर्फ नए समझौते से इनकार कर रही है।

कुरैशी का फिर इनकार
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को फिर साफ कर दिया कि अमेरिका को एयर या मिलिट्री बेस नहीं दिए जाएंगे। कुरैशी ने कहा- यह बात सही है कि अमेरिका हमसे इस तरह की मांग कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान की कुछ चिंताएं हैं। हम उन्हें यह सुविधा नहीं दे सकते। जब उनसे यह पूछा गया कि अमेरिका ने पाकिस्तान को कुछ ऑफर दिए हैं तो उन्होंने इसका गोलमोल जवाब दिया। वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा- पाकिस्तान और अमेरिका की बातचीत एक टकराव के स्तर पर पहुंच गई है।

CIA चीफ क्यों आए थे
पाकिस्तान सरकार यह मानने तैयार नहीं है कि CIA चीफ विलियम बर्न्स ने इसी हफ्ते इस्लामाबाद का गुपचुप दौरा किया था। लेकिन, मीडिया में यह खबर लीक हो चुकी है। सवाल यह है कि बर्न्स क्यों आए थे और उनकी किससे और क्या बातचीत हुई। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार और फौज एयर और मिलिट्री बेस देने पर सौदेबाजी कर रही है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि डील तो पहले ही हो चुकी है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पाकिस्तान सरकार या फौज अमेरिका को अड्डे देने से इनकार कर ही नहीं सकती। अगर उसने ऐसा किया तो पाकिस्तान बेहद गहरी मुश्किलों में फंस जाएगा।

कौन सर बोल रहा है और कौन झूठ
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, CIA चीफ ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल बाजवा और आईएसआई हेड जनरल फैज से मुलाकात की। डिफेंस सेक्रेटरी जनरल लॉयड आस्टिन भी पाकिस्तान सरकार और फौज से बात कर चुके हैं। ऐसे में सवाल ही पैदा नहीं होता कि पाकिस्तान अब अमेरिका को इनकार कर सके।

पाकिस्तान की चिंता चीन को लेकर भी है। अगर वो अमेरिका को अड्डे देता है तो चीन उसकी मदद बंद कर देगा। बीजिंग इसका इशारा पहले ही कर चुका है। ऐसे में पाकिस्तान के सामने एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई जैसा मामला है। तीसरा खतरा तालिबान का है। उसने बाकायदा बयान जारी कर कह दिया है कि अगर अमेरिका को अड्डे दिए गए तो पाकिस्तान को गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे। पाकिस्तान की जनता भी अमेरिका के खिलाफ है।

 

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