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Tag Archives: कविता

पाकिस्तान व्हीकल है रक्षा पंक्ति प्रबल है

 पार्क दरिंदे मदिरा पीकर               बने हुए क्यों नहीं रे बावले।               तूने अपनी पागल मस्ती में।             कितने घर बेघर कर डाले।   अपने घर तू जो चाहे कर।            ...

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