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MP मे 42 % बच्चे कमजोर, 52 % महिलाओं मे खून की कमी, 68लाख गरीब

भोपाल. देश भर मे इस वक़्त सूचकांक रिपोर्ट के आधार पर राज्यों की तुलना हो रही है, ऐसे मे मध्य प्रदेश मे भी जो स्थिति है, वो कहीं ज्यादा गंभीर है, वहीं कमाल नाथ सरकार के लिए एक प्रकार से चुनौती भी है. देश की आई सूचकांक रिपोर्ट की बात करें तो, मध्य प्रदेश इस वक़्त पोषण में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार प्रदेश में वर्ष से कम आयु के 42 प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं. 25.8 प्रतिशत कमजोर एवं 42.8 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं। इन रिपोर्ट की बात करें तो पिछले 15 सालों से मध्य प्रदेश मे भाजपा की शिव राज सिंह चौहान की सरकार रही है. ऐसे मे कमलनाथ सरकार के पास आरोप्प उनपर लगाने का पूरा मौका है. जबकि उनके लिटये ये एक चुनौती भी है.

राज्य में प्रति हजार जीवित जन्म पर शिशु मृत्यु दर 47 हैजो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर 33 प्रति हजार है। राज्य में मातृत्व मृत्यु दर प्रति एक लाख प्रसव पर173 हैजो राष्ट्रीय दर 130 और अधिकतर राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है।

गरीबी का अनुपात 21.65%  देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन  करने वाले व्यक्तियों का अनुपात21.92 प्रतिशतजबकि मध्यप्रदेश में 31.65 प्रतिशत है। देश में उत्तरप्रदेश और बिहार को छोड़कर मध्यप्रदेश में सर्वाधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे हैजिनकी संख्या करोड़ 34 लाख है। केवल 30 प्रतिशत लोग खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते हैं।

राज्य में सिर्फ 23% घरों में नल से पानी आता है। राष्ट्रीय कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की रिपोर्ट वर्क2018-19 के अनुसार प्रदेश में कृषि मजदूरी की दर 210 रुपए देश के अन्य राज्यों की तुलना में न्यूनतम है। मनरेगा में 68.25 लाख परिवार दर्ज हैंजो व्यापक गरीबी का सूचक है।

प्रदेश में वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर 77 (वर्ष 2011) है। यह असम को छोड़कर देश में सर्वाधिक है। प्रदेश में 52.4% महिलाओं में खून की कमी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकोंनर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं।

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