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फैशन के दौर में लड़के लडकियां दे रहे हैं मौत को दावत पकडे जाने पे “चाचा विधायक हैं” जैसे बहाने करते हैं युवा

जमाना बहुत तेज़ी से तरक्की कर रहा है जिसके चलते फैशन और पश्चिमी संस्कृति नौजवान युवाओ को बहुत तेज़ी से अपनी ओर आकर्षित कर रही है . पश्चिमी सभ्यता को गलत नहीं बोला जा सकता है मगर सब को पता है कि हर एक सिक्के के दो पहलु होते हैं . नौजवान युवा फैशन से काफी हद तक प्रवाभित है जिसके चलते वो अपनी जान जोखिम में डालते हैं . जी हाँ हम बात कर रहे हैं ट्रैफिक समस्याओं की और इस पर युवा कितना अमल करते हैं इस मुद्दे की

फैशन के चलते हेलमेट ना लगाकर मौत को दावत देना :आज कल तो हेलमेट ना लगाना एक आम बात हो गयी है . और लोग इसको ज्यादा महत्त्व देना ज़रूरी भी नहीं समझते , आए दिन हो रही रोड दुर्घटनाओ में देखा गया है की हेलमेट नहीं लगाने की वजह से सर में गंभीर चोट लगती है , और अनगिनत जाने चली जाती हैं . नौजवानों को अपने बाल ख़राब होने का डर रहता है जिसके लिए वो अपनी जान जोखिम में डालते हैं .

वाहन चलाते वक्त कानो में “headphons” :लड़के लडकियां वाहन चलाते वक्त कानो में “headphons” लगा कर चलते हैं . स्वाभाविक सी बात है आपको गाडियों के हॉर्न नहीं सुनाई देंगे . जिसके चलते गंभीर रूप से एक्सीडेंट का शिकार हो जाते हैं . कई बार अपनी जान गवाने की नौबत भी आ जाती है. और कितनो ने इस वजह से अपनी जान गवा भी दी है .

फैशन के दौर में हेलमेट को नज़रंदाज़ करना :हेलमेट को नज़रंदाज़ करना एक ट्रेंड सा बन गया है . ठण्ड में तो काफी हद तक हेलमेट का प्रयोग करते हैं लेकिन जैसे है गर्मिया आती हैं हेलमेट को लगाने की बजाये मोटर साइकिल के हैंडल पर टांगना या फिर तो हाथ में टांगना आम बात है . पुलिस के रोकने का भी कोई डर नहीं उल्टा पुलिस से बत्तामीज़ी करना . इनका कहना है कि चालान ही तो काट सकते हैं आप इससे ज्यादा और क्या कर लेंगे .

“चाचा विधायक हैं: क्या कर लेंगे”“चाचा विधायक हैं” ये संवाद तो आपने सुना ही होगा . हाँ जी जिनके भी चाचा या पिता विधायक हैं वो सिर्फ ट्रैफिक के नियम तोड़ने और अपने बच्चो ट्रैफिक पुलिस से छुड़ाने का ही काम करते हैं. नियमो का उल्लंघन करने में इनके भी बड़ा हाथ है क्योंकि पकडे जाने पे जिन लोगो की ऊपर पहुच होती है वो एक कॉल कर छूट जाते है. पुलिस करे भी तो क्या करे ?

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