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CG : दो महीने में छठवीं बार सरकार ने लिया कर्ज, लिए 58 हजार करोड़

रायपुर:छत्तीसगढ़ सरकार ने फिर साढ़े सात सौ करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) के माध्यम से लिए गए इस लोन को सरकार तीन वर्ष में चुकाएगी। वह भी करीब साढ़े सात फीसद ब्याज दर पर। दो महीने में यह छठवां मौका है, जब सरकार ने अपनी प्रतिभूति (सिक्योरिटी बांड) बेची है। इससे राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर 58 हजार करोड़ के पार पहुंच गया है। तीन महीने पुरानी कांग्रेस सरकार अपने इस छोटे कार्यकाल में अब तक सात हजार करोड़ से अधिक का बांड बेच चुकी है।

छह बार में लिए गए इस कर्ज के लिए सरकार औसत आठ फीसद ब्याज भरेगी और दो से लेकर छह वर्ष में चुकाएगी। अर्थशास्त्री डॉ. हुनमंत यादव कहते हैं कि बजट की व्यवस्था के लिए सरकार के पास बांड बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य सरकारों के पास टैक्स का विकल्प ज्यादा नहीं बचा है। पेट्रोल जैसी कुछ वस्तुएं हैं जिन पर राज्य टैक्स लगा सकता है, लेकिन इसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा। ऐसे में सरकार इससे बचती है। सत्ता में आने के लिए सरकार ने राज्य के किसानों से कृषि ऋण माफ करने का वादा किया था। इसके तहत अब तक सरकार 10 हजार करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण माफ कर चुकी है।

ग्रामीण और सहकारी बैंकों का 62 सौ करोड़ तथा व्यवसायिक बैंकों का चार हजार 17 करोड़ रुपये शामिल है। इसके साथ ही सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। इसकी वजह से सरकार पर करीब 54 सौ करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है। सरकार के दनादन कर्ज लेने का असर राज्य में अधोसंरचना विकास समेत अन्य विकास कार्यों पर पड़ रहा है। हाल ही में संपन्न् हुए विधानसभा के बजट सत्र में विधायकों ने मनरेगा का काम तक ठप होने का आरोप लगाया था। अर्थशास्त्री भी मान रहे हैं कि कर्ज की राशि ब्याज के साथ चुकाना है तो इसका असर कहीं न कहीं पड़ेगा ही।

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