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99% जनता को नहीं पता होगा,हर नोट पर क्यों लिखा होता है- ‘मैं धारक को अदा करने का वचन देता हूं’

रोज़ मर्राह के जीवन में जो जो हमारे सबसे ज़्यादा काम आता है वो है पैसा,आपने अपने जीवन में 5 रूपए के नोट से लेकर 2,000 के नोटों तक देखा होगा,और किसी न किसी वस्तु की खरीदारी के लिए की ही होगी। और हो सकता है की आपने कभी नोट पर लिखी वो शपत भी पढ़ी हो,पर शायद ही आपकी समझ में उस शपत के सही मैने समझ आये हो। ‘मैं धारक को अदा करने का वचन देता हूं।’ आपने भी नोटों पर यह शपत जरूर पढ़ी होगी। लेकिन क्या आपको पता है इस वाक्य के पीछे क्या कहानी है। और यह सभी नोटों पर आखिर क्यों लिखा होता है,तो आइये आपको इसकी जानकारी देते है।

यह सवाल कई परिक्षाओं और इंटरव्यू में भी पूछा जा चूका है। ऐसे में आपको इस बारे में पता होना जरूरी है। दरअसल, RBI जितने की करंसी प्रिंट करती है। उसी कीमत का गोल्ड अपने पास सुरक्षित रखती है। वह धारक को ये विश्वास दिलाने के लिए यह कथन लिखती है। कि यदि आपके पास बीस रुपया है। तो इसका मतलब यह है कि रिज़र्व बैंक के पास आपका 20 रुपये का सोना रिज़र्व है।

इसी तरह से अन्य नोटों पर भी यह लिखा होने का मतलब है कि जो नोट आपके पास है आप उस नोट के धारक है। उसके मूल्य के बराबर आपका सोना रिजर्व बैंक के पास है। रिजर्व बैंक वो सोना उस नोट के बदले आपको देने के लिए वचनबद्ध है।

तो अगर आज के बाद कोई आपसे भी इस शपत का मतलब पूछे तो बताये बिना ना रहे.

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