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हिन्दू – मुस्लिम की एकता की मिसाल है बड़ा मंगल

बड़ा मंगल लखनऊ के लिए धर्म निरपेक्षता और लखनऊ वासियों के क्रॉस-धार्मिक विश्वासों का उदाहरण देता है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी में मनाया जाने वाला बड़ा मंगल सिर्फ हिन्दू धर्म की आस्था का प्रतीक नहीं है बल्कि इससे मुस्लिम धर्म की भी आस्था जुडी हुई है . इस आयोजन में हर धर्म के लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते लेते हैं . इसी लिए बड़ा मंगल को एकता का प्रतीक मन जाता है . यह त्यौहार लखनऊ के लोगों की धर्म निरपेक्षता और धार्मिक मान्यताओं का सबसे बड़ा उदाहरण है। मस्जिदों और मंदिरों का निर्माण करने वाले हिंदुओं के असंख्य उदाहरण लखनऊ में देखे जा सकते हैं। लखनऊ आज तक एक शांतिपूर्ण शहर है, जिसमें किसी भी सांप्रदायिक हिंसा का कोई इतिहास नहीं है या विपरीत क्षेत्रों के प्रति कोई असहिष्णुता नहीं दिखाई गई है। बाड़ा मंगल को लखनऊ हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है।

बड़े मंगल का इतिहास : राजधानी में मनाया जाने वाला बड़ा मंगल वैसे तो हिन्दुओ का त्यौहार है लेकिन इसकी शुरुआत एक मुस्लिम शशक ने की थी , अवध साम्राज्य के तीसरे नवाब की दूसरी पत्नी, बेगम जनाब-ए-आलिया, शुजा-उद-दौला (1753-1775) ने एक दिव्य उपस्थिति का सपना देखा उसे भगवान हनुमान को सम्मानित करते हुए एक मंदिर बनाने का आदेश दिया . सपने में नवाब की पत्नी को एक विशिष्ट स्थल की ओर इशारा किया जहाँ हनुमान की एक मूर्ति दफन थी।तदनुसार, बेगम ने स्थल की खुदाई करने का आदेश दिया और जब मूर्ति मिली, तो उसने उसे वापस एक हाथी पर लखनऊ ले जाने की व्यवस्था की।हालांकि, कुछ दूरी तय करने के बाद हाथी अपनी पटरियों पर रुक गया और हिलने से मना कर दिया
बेगम ने इसे एक और दिव्य संकेत के रूप में माना और वर्तमान अलीगंज में इस स्थान पर एक मंदिर के निर्माण का आदेश दिया तब से, हर साल, न केवल यूपी से बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी भक्त ज्येष्ठ के चार मंगलवार को बड़ी संख्या में लखनऊ के हनुमान मंदिर में आते हैं।

आज तक उसी जगह पर बैठा है हौदा : मूर्ति को स्वच्छ कराकर नवाबी आदेश से उसे सोने चांदी और केवल जिस हौदे पर बिठाकर हाथी पर रखा गया। इसे आसिफुद्दौला के बड़े इमामबाड़े के पास मंदिर बनाकर स्थापित कराने के लिए ले जाया जा रहा है। इस हाथी को लेकर जब वर्तमान अलीगंज सड़क से (जो उस समय गलियारा था) जा रहे थे तो हाथी रुक गया और महावत के बहुत प्रयासों के बाद भी आगे नहीं बढ़ा। इसके बाद बेगम ने उसकी पीठ से हौदा उतरवा दिया, जिसके बाद वह हौदा वहीं बैठ गई।

बेगम ने साधू को बनाया था महंत:मान्यता है कि इसके बाद एक साधु ने बेगम से कहा कि हनुमान जी गोमती पार नहीं जाना चाहते हैं, क्योंकि वह लक्ष्मण का क्षेत्र है। तब बेगम साहिबा ने इसी स्थान पर मूर्ति स्थापित कर एक मंदिर बनवा दिया और साधू को सरकारी खर्चे पर महंत कर दिया।

कुछ इस रूप में मनाया जाता है बड़ा मंगल :
शहर के सभी परिवारों और यहाँ तक कि कॉरपोरेट घरानों, दुकान दारों और निवासियों को इन चार मंगलवारों को सार्वजनिक उपभोग की दावत देने के लिए तैयार किया जाता है। शहर की हर सड़क राहगीरों को दावत देने के लिए तयार रहती है . गरमा गरम प्याज के छिड़काव के साथ आलू की सब्जी और चटनी के साथ गरमागरम लोबिया और तंदूरी रोटियां शामिल हैं। एक गिलास ठंडा रस / शर्बत से दावत का दौर चलता है! कुछ जगहों पर मिठाइयां भी बांटी जाती हैं। शाम के समय बच्चे भक्तों के लिए मंदिरों के आसपास स्थापित होने वाले मेलों का आनंद लेते हैं। लखनऊ की चिलचिलाती गर्मी में भक्तों को पानी और भोजन देने के लिए बड़ी संख्या में हिन्दू मुस्लिम सब मिल कर स्टाल लगाते हैं .

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