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आजकल की व्यस्त जिंदगी में शायद ही लोग अपने बारे में छोड़कर देश-दुनिया के बारे में सोचते होंगे। 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन ही देशभक्ति जागती है। उस दिन लोग सोशल साइट्स पर अपना देशप्रेम पोस्ट करते है। एक तरफ हम बोलते है कि हमारे देश में गन्दगी, गरीबी और भूखमरी फैली हुई है वही दूसरी ओर हम खुद ही गंदगी फैलाते है। अगर हम सच में देश से प्रेम करते है तो उसे गन्दा क्यों करते है?

कई लोगों को कहते सुना है कि ”मेरे लिए देश सबसे पहले है”। इसका मतलब यह है कि हर काम करते वक़्त पहले देश के बारे में सोचा जाए और जिस काम से देश का भला हो वही काम किया जाए।अगर मैं अपनी बात करूँ तो शायद मेरा स्वार्थी मन अधिकांश अपने या अपने प्रियजनों के विषय में ही सोचता है।

युवावस्था जिंदगी का एक ऐसा समय होता है जहा आजादी की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने काफी संघर्ष के बाद हमें आजादी दिलायी थी। तब उनके लिए आजादी के मायने अलग थे लेकिन आजादी के इतने सालो बाद हमारे विचारों के आदान-प्रदान से लेकर तकनीक,शिक्षा, संसाधन हर तरह की आजादी है। इस तरह से हमे आजादी के मायने समझ में आते है उसी में हमारे अंदर देशभक्ति क्या है वो भी हम समझते है। इस आधुनिक युग में एक सच यह भी है कि आज की युवापीढ़ी सोशल साइट्स के जरिये अपने अधिकारों का इस्तेमाल नए भारत के निर्माण के लिए भी कर रहे है।

अब देशभक्ति के मायने को बेहद सस्ता बना दिया गया हैं। पूरे साल गुंडे देशभक्ति और देशद्रोही का प्रमाणपत्र देते घूमते है। हमारे लिए जब सर्जिकल स्ट्राइक जैसा कदम उठाया जाता है तब देशभक्ति जागती है या जब हमारे जवानों को मर दिया जाता है। तब लोगो का खून खौलता है।

देशभक्ति के असल मायने है ”देश की सप्रभुता” मतलब हमारा देश आर्थिक व विदेशी निति के मामले में निर्णय लेने के लिए आजाद हो। आजकल देशभक्ति या देश के बारे में सोचने का अंदाज़ भले ही अलग हो लेकिन लोग आजादी के पीछे हुए संघर्ष और बलिदानों की अहमियत समझते है बस यही हमारे दिल में देश के प्रति प्यार रखता हैं।