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हफ्ते भर में ही 56 गोदें सूनीं,मस्तिष्क ज्वर से एक दिन में 25 बच्चों की मौत

मुजफ्फरपुर/वैशाली. भीषण गर्मी के बीच मस्तिष्क ज्वर की चपेट में अाए 44 में से 20 बच्चाें की साेमवार काे एसकेएमसीएच में माैत हाे गई। अन्य 24 बच्चाें की स्थिति गंभीर बनी हुई है। हफ्ते भर में कुल 51 बच्चे दम ताेड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रख रहा है। लोगों को इस बीमारी को लेकर जागरूक करना होगा। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव ने अफसरों के साथ वीडियाे काॅन्फ्रेंसिंग कर जायजा लिया।

एक दिन में 20 बच्चाें की जान जाने के बाद परिजनाें की चीत्कार से एसकेएमसीएच गमगीन हाे गया। डाॅक्टराें ने बताया कि अधिकतर बच्चाें की स्थिति गंभीर है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सर्वाधिक माैतें हाइपाेग्लाइसीमिया (ब्लड में शुगर की कमी) से हुई हैं । स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अबतक 11 की मौत की पुष्टि की है। कहा कि मात्र एक बच्चे की मौत जेई से हुई है।

वैशाली के भगवानपुर में पांच बच्चों ने दम ताेड़ा
उधर, बीते 24 घंटे में वैशाली के भगवानपुर थाना क्षेत्र के हरवंशपुर पश्चिमी टोला में चार जबकि खिरखौआ गांव में एक बच्चे की मौत दिमागी बुखार से हाे गई। दोनों गांव के छह से अधिक बच्चे इस बीमारी से ग्रसित हैं। मृतकों में हरवंशपुर के चतुरी सहनी के दो पुत्र सात वर्षीय प्रिंस व दो वर्षीय छोटू, राजेश सहनी की पुत्री सात वर्षीय रूपा, दिलीप मांझी का पुत्र तीन वर्षीय ब्रजेश व खिरखौआ के सुमेश पासवान का पुत्र सात वर्षीय अमरेश कुमार उर्फ भोला शामिल हैं। कुछ दिन पहले पचपैका गांव में सगी बहनाें की माैत हाे गई थी।

बढ़ने लगी बच्चाें की माैत की तादाद तब जागा प्रशासन

एक सप्ताह में चमकी बुखार यानी मस्तिष्क ज्वर के कारण नौनिहालों की माैत की तादाद बढ़ने के बाद साेमवार काे शासन-प्रशासन भी अंतत: सक्रिय हुआ। नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा ने अस्पतालों में मरीजों का हाल जाना। प्रशासनिक हलके में बैठकों का दाैर शुरू हुआ। प्रमंडलीय आयुक्त नर्मदेश्वर लाल ने प्रभारी डीएम उज्ज्वल कुमार सिंह (डीडीसी) और सिविल सर्जन डाॅ. एसपी सिंह समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर बीमारी से बचाव की तैयारियों पर नाराजगी जताई। तैयारियों काे आधा-अधूरा बताते हुए इस पर सवाल उठाए।

उधर, सिविल सर्जन डाॅ. सिंह ने सभी पीएचसी प्रभारियों के साथ बैठक की। पीएचसी में इलाज की व्यवस्था करने और  गंभीर मरीजाें काे तुरंत रेफर करने काे कहा। प्रमंडलीय आयुक्त ने बीमारी पर रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्याें की समीक्षा की। प्रचार-प्रसार की व्यवस्था की जानकारी मांगी। सिविल सर्जन ने तैयारियों के साथ उपलब्ध दवाओ की जानकारी दी। आयुक्त ने सघन प्रचार-प्रसार नहीं करने के लिए जिला प्रशासन को फटकार लगाई और  सभी चिह्नित इलाकों में प्रचार-प्रसार तय करने काे कहा। चिकित्सकों ने आयुक्त को चमकी बुखार वाले बच्चों के खून में चीनी की कमी होने और समय पर अस्पताल पहुंच जाने पर इलाज आसान हाेने की बात कही।

मस्तिष्क ज्वर से सोमवार को मरने वाले 20 बच्चाें की सूची

1. शबाना खातून (3 वर्ष), कांटी

2. रूबी कुमारी (3 वर्ष), मीनापुर

3. साकेत कुमार (5 वर्ष), मोतिहारी

4. ज्योति कुमारी (8 वर्ष), अहियापुर

5. काजल कुमारी (4 वर्ष), हथौड़ी

6. ज्योति कुमारी (10 वर्ष), सीतामढ़ी

7. राहुल कुमार (10 वर्ष), अहियापुर

8. सैयशा (डेढ़ वर्ष), कुढ़नी

9. सुचिता (3 वर्ष), सीतामढ़ी

10. प्रिया कुमारी (3 वर्ष), मीनापुर

11. रूपा कुमारी (7 वर्ष),वैशाली

12. प्रियांशु कुमार (5 वर्ष), मीनापुर

13. सोनू कुमार (5 वर्ष), पूर्वी चंपारण

14. फरीदा खातून (5 वर्ष), बरुराज

15. विराज मुखिया (डेढ़ वर्ष), सीतामढ़ी

16. कन्हाई कुमार (5 वर्ष) सीतामढ़ी

17. सीता (7 वर्ष) सकरा

18. शालू कुमार (8 वर्ष) गायघाट

19. राजा बाबू (8 वर्ष) सरैया

20. रचना (5 वर्ष) कांटी

सीएस ने कहा : अपने स्वास्थ्य केन्द्रों में इलाज की समुचित व्यवस्था का करें प्रचार 
सिविल सर्जन डा. एसपी सिंह ने सभी स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रभारियों के साथ अपने कार्यालय कक्ष में विशेष बैठक की। उन्होंने चमकी रोग में बच्चों के शरीर में चीनी की बेहद कमी हो जाने तथा समय से बच्चों के खाना नहीं खाने की जानकारी दी। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रभारियों काे अपने यहां उपचार की व्यवस्था के साथ ही अवश्यक दवाओ  की उपलब्धता सुनिश्चित करने काे कहा। स्थिति गंभीर दिखे ताे उसे तत्काल एसकेएमसीएच में रेफर करने काे कहा।

2010 से अब तक 398 मासूम हाे चुके हैं मस्तिष्क ज्वर (एईएस) के शिकार

मुजफ्फरपुर समेत तिरहुत प्रमंडल के जिलाें में मस्तिष्क ज्वर (एईएस) का प्रकाेप 21 वर्षाें से है। लेकिन, 2010 में जब 24 बच्चाें की माैत एक सीजन में हाे गई ताे स्वास्थ्य महकमा इसके प्रति सजग हुआ । लेकिन, आज तक इसके वायरस की खाेज नहीं हाे सकी है। 2010 से लेकर 10 जून 2019 की शाम तक 398 बच्चाें की माैत इस बीमारी से हाे चुकी है।

साल भर्ती मौतें
2010 59 24
2011 121 45
2012 336 120
2013 124 39
2014 701 90
2015 75 11
2016 31 04
2017 17 11
2018 14 07
2019 119 51
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