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सोशल मीडिया पर हो रहीं तस्वीरें वायरल डेनमार्क में हर वर्ष क्यों काट दी जाती हैं सैकड़ों व्हेल मछलियां?

परंपराएं हमेशा से ही मानव सभ्यता की एक अभिन्न हिस्सा रही हैं, लेकिन इसके नाम पर जीवों का नरसंहार भी हमेशा से ही होता आया है। ऐसी ही एक परंपरा के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसके नाम पर हर वर्ष सैकड़ों व्हेल मछलियों को मौत के घाट ही उतार दिया जाता है।

आपको बता दें की यह खूनी परंपरा डेनमार्क के फैरो आइलैंड पर निभाई जाती है। दरअसल, यहां ग्रीनडैडरैप नाम का एक त्योहार मनाया जाता है, जिसके नाम पर हर साल करीब 800 व्हेल और डॉल्फिन मछलियों को काट दिया जाता है। हैरानी की बात तो ये है कि इस खूनी परंपरा का विरोध न तो वहां के लोग करते हैं और न ही सरकार।

फैरो आइलैंड के लोगों का तो यहां तक कहना है कि यह परंपरा 435 साल यानी की वर्ष 1584 से ही चली आ रही है। हालांकि डेनमार्क में व्हेल का शिकार गैरकानूनी है, लेकिन यहां इस आइलैंड पर इस तरह का कोई भी नियम लागू नहीं होता है।

दरअसल, फैरो आइलैंड के लोगों का मुख्य आहार ही व्हेल मीट है, जिसको वो बड़े चाव से खाते हैं। जब यहां पर त्योहार का समय आता है तो सैकड़ों मछुआरे समुद्र में व्हेल मछलियों को पकड़ने के लिए उतरते हैं। फिर उन्हें पकड़कर किनारे पर ले आते हैं और धारदार हथियारों से काट देते हैं, जिसके बाद पलभर में ही व्हेल की मौत हो जाती है।

सोशल मीडिया पर जब व्हेल मछलियों के इस नरसंहार की तस्वीरें वायरल हुईं तो लोगों ने इसका खूब विरोध किया। हालांकि इस बारे में डेनमार्क के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि व्हेल मछलियों का शिकार करना फैरो आइलैंड के लोगों के जीवन का एक प्रमुख हिस्सा, जिसका उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर मान्यता मिली हुई है।

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