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सीआरपीएफ की तैनाती से अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के मतदाताओं ने निर्भीक होकर दिया वोट

पटना. बिहार के चार नक्सल प्रभावित लोकसभा क्षेत्रों नवादा, गया, जमुई और औरंगाबाद में गुरुवार को चुनाव हो गया। सीआरपीएफ की बड़ी तादाद में हुई तैनाती की वजह से इन चारों लोकसभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने निर्भिक होकर मताधिकार कर प्रयोग किया। जवानों की तैनाती सुदूर क्षेत्रों में भी की गई थी। नक्सलियों के लगातार वोट बहिष्कार व धमकियों के बावजूद भी लोकसभा चुनाव-2014 के आंकड़ों कि अपेक्षा लोकसभा चुनाव-2019 में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि गया जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों जैसे छकरबंधा में वर्ष 2014 में जहां 34-35 प्रतिशत वोट डाले गए थे इस बार 50 फीसदी लोगों ने वोट दिए।

वहीं इसी लोकसभा के बहेरा (इमामगंज) में वर्ष 2014 में 33-34 फीसदी वोट हुआ था पर 2019 में यहां 55 फीसदी वोट डाले गए। गया के ही धनेटा (बांके बाजार) में पिछली बार 40 मतदान हुआ था पर इसबार से बढ़कर 67 प्रतिशत वोट डाले गए। सेवरा (मैगरा) में करीब 20 फीसदी अधिक मतदान हुआ। डुमरिया में भी 15-20 फीसदी मताधिकार में वृद्धि हुई।

अतिनक्सल प्रभावित सुदूर गांवों में 60% लोगों ने भयमुक्त मतदान किया 

जमुई एवं नवादा क्षेत्र में वर्ष 2014 के दौरान 49.75 से बढ़कर 2019 में 53.06 फीसदी लोगों ने वोट दिए। खास बात यह है कि जहां एक तरफ गैर नक्सल क्षेत्रों में 55-56 फीसदी ने वोट डाले वहीं अतिनक्सल प्रभावित सुदूर गांवों में 60 प्रतिशत लोगों ने भयमुक्त होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। यही नहीं सीआरपीएफ जवानों ने बुजुर्ग एवं लाचार वोटरों को वोट देने में मदद की।

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