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सरकार की सफाई के बाद चाटुकारिता मिडिया बताये कहाँ कितने आतंकी मारे गये..?

एयर स्ट्राइक को लेकर सियासत शुरू हो गई है और ये होनी ही थी। क्योंकि चुनाव सर पर है। सरकार के एक मंत्री एस. एस. अहलुवालिया ने बड़ा और अजीब ब्यान दिया। उन्होंने सिलीगुड़ी में मीडियाकर्मियों के सवाल के जवाब में कहा की हवाई हमले का उदेश्य पड़ोसी देश को चेतावनी देना था किसी को मारने का नहीं, पीएम मोदीजी या भाजपा के प्रवक्ता किसी ने नहीं कहा की हवाई हमले में 300 लोग मारे गये..! लेकिन भारत के मिडिया और सोशल मिडिया में ही ये आंकड़ा आया की 300 से लेकर 350 आतंकी मारे गये। हमारे पीएम मोदीजी ने ये कभी नहीं कहा की हवाई हमले में कितने मारे गये। अहलुवालिया सरकार के एक जिम्मेवार मंत्री और अंग है। उनका ब्यान सरकार का ब्यान होता है। उनके इस विवादी ब्यान के बाद सरकार या भाजपा ने अपने आप को दूर नहीं किया। मंत्री अहलुवालिया का बयान उस चाटुकारिता मिडिया की गाल पर चांटा है जो सरकार के तलवे चाट रहे है। जो मोदी सरकार का एजंडा अपना एजंडा मान कर चौथी जागीर की हत्या नहीं लेकिन आत्महत्या कर रहे है।

ये वही मिडिया है जो भारतीय सेना को नक्शे-आंकडें आदि। दिखाकर बिन पूछे सलाह दे रहे थे की हमारी सेना को कहा एटेक करना चाहिए…! ऐसे एंकर जिसने कभी युद्ध देखा नहीं वे सेना को और महंगाई में पीस रहे लोगो को भड़का रहे थे की भारत को युध्ध करना चाहिए…! सेना के जवान कहां हमला करे तो जित सकते है वह चाटुकारिता मिडिया के अति उत्साहित एंकर सेनापति की अदा में बता रहे थे। युध्ध का उन्माद नशे से कम नहीं और ये नशा उतर गया हो तो और अभी भी न उतरा हो तो अहलुवालिया के बयान के बाद ये नशा उतरना चाहिए। मोदी सरकार के मत्री महोदय भोले भाव से कह रहे की 300 आतंकी मारे गये ये आंकड़ा हमने नहीं दिया। ये तो मिडिया ने दिया है। उन्होनें भारत के मिडिया की विश्वसनियता पर निशानियाँ सवाल है की मिडिया को ये किसने बताया की 300 से ज्यादा आतंकी मारे गये…? सरकार ने? सेना के किसी सोर्स ने या 350 केजी आरडीएक्स से 40 से ज्यादा जवानों को शहीद किये तो उसके बदले में वायुसेना ने 350 आतंकी मार गिराये ऐसा किसी ने तालमेल बिठा कर कहा…? या ये आंकड़ा चाटुकारिता मिडिया ने अपने तेज तर्रार दिमाग का उपयोग सरकार के पक्ष में जाहिर किया…?

भारत के मिडिया को कोई गोदी मिडिया कहता है तो कोई चाटुकारिता मिडिया तो कोई क्या कहता है। आखिर मिडिया के बारे में ऐसा क्यों कहा जा रहा है, मिडिया के लिए ऐसे अपमानजनक शब्द का प्रयोग क्यों हो रहा है…? इसके लिए कौन जिम्मेवार है…? खुद मिडिया या कोई ओर…? मंत्री अहलुवालिया के बयान का मिडिया को जवाब देना चाहिए और बताना चाहिए की ये आंकड़ा किसने किस आधार पर दिया…? सरकार मुकर रही है। प्रधानमंत्रीजी ने भी ये आंकड़ा नहीं कहा, वायुसेना ने भी नहीं कहा, भाजपा ने भी नहीं कहा तो फिर पूरी जिम्मेवारी मिडिया के उपर कैसे आई…? क्यों सोसियल मिडिया में अब लोग ये लिखते है की ये बात आपको भारत की मिडिया नहीं बतायेंगी..! ऐसा तो पहले कभी नहीं हुवा भारत के मिडिया में। मिडिया को ढाल बनाकर अपना एजंडा सेट कर रहे कुछ राजनितिक नेतागण की साजिश का शिकार मिडिया कब तक बनेंगा…? कब तक चलेंगी ये चाटुकारिता…? कब पाठको को-दर्शकों को देखने मिलेंगी असली चौथी जागीर की असली निष्पक्ष पत्रकारिता…? अब भी वक्त है संभल जाए मिडिया इससे पहले की देर ना हो जाये…कहीं देर ना हो जाय..!

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