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सच लिखने पर मीडिया पे गिरती है भाजपा की गांज

केंद्रीय अन्वेशण ब्यूरो (सीबीआई) ने पिछले एक सप्ताह में 19 राज्यों के 110 ठिकानों पर छापे मारे हैं. यह छापेमारी भ्रष्टाचारो, धोखाधडी, तस्करी किये हुए हथियार और 10 मामलो में किये जा रहे हैं. मंगलवार को शुरू किये गये इस अभियान में अब तक 30 से ज्यादा अलग अलग केस दर्ज किये जा चुके हैं. बैंक समेत नेताओ के घर से अब तक कुछ 2 लाख करोड़ रूपए रिकवर किये गए हैं.

सूत्रों की माने तो सीबीआई के पास भाजपा नेताओ पर छापा मारने का वार्रेंट नहीं था, मानो की भाजपा और उनके गठबंधन के साथी ही साफ़ हो और बाकी सब चोर. क्या सीबीआई का पैसो से मुह बंद करवा दिया गया है या फिर केंद्र होने का भरपूर फायदा उठा रही है भाजपा.

  • 19 राज्यों के 110 ठिकानों पर सीबीआई की छापेमारी: न्यूज़ इंडिया लाइव को सूत्रों से पता चला की छापेमारी में आपत्ति जनक कृत्य, भ्रष्टचार्य और हथियारों की तस्करी से जुड़े 30 अलग अलग नए मामले दर्ज किये गए हैं. जिनमे 16 नए बैंक फ्रॉड भी शामिल थे. सीबीआई के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, लुधियाना, ठाणे, पुणे आदि कई और शहरो में की हुई छापेमारी. 30 नई एफआईआर कई कंपनियां, फर्म्स, प्रमोटर्स, डायरेक्टर, बैंक अधिकारियों और कुछ निजी लोगों के खिलाफ दर्ज की गईं. इंडिया टुडे को जानकारी मिली है कि कुछ छापेमारी मुंबई, दिल्ली, एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में की गई.
  • छापेमारी में कोई भी नेता भाजपा के नहीं थे: सूत्रों से पता चला की सीबीआई को वार्रेंट नहीं था की भाजपा नेताओ के घर या ऑफिस में छापेमारी की जाये. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा की “जो भी भजपा के खिलाफ बोलता है उस पर छापेमारी की जा रही है, इसी तरह से वो सरकार को चला रहे हैं” प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चन्द्रमोहन ने कहा कि अखिलेश को आभास है कि उनके कार्यकाल के दौरान यूपी में भ्रष्टाचार के मामले भाजपा सरकार में जरूर खुलेंगे क्योंकि यह सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है.
  • सच लिखने पर मीडिया पे गिरती है भाजपा की गांज: जब भी लोकतन्त्र का चौथा स्तंभ देश की जनता को सच से वाकिफ करवाने की कोशिश की कोशिश करती है भाजपा सरकार आड़े आ कर खड़ी हो जाती है. इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है की मीडिया को अपने काबू में कर लिया गया है और उनसे सच लिखने और बोलने का हक़ छीन लिया गया है. यदि कोई मीडिया सच दिखाना चाहे तो उस पर कार्यवाही कर दी जाती है, कितने ही पत्रकारों को मौत के घाट उतार दिया गया. नहीं सुधरे तो उनका चैनल, पेपर और इन्टरनेट पोर्टल पूरी तरह से खतम कर दिया है. आज के युग में बस वही मीडिया टिक सकती है जो भाजपा के हिसाब से चले.
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