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शायरी: न उस प्यार का दर्द है और न कोई एहसास

तेरे इश्क से ही मिली है मेरे वजूद को ये शोहरत,

मेरा जिक्र ही कहाँ था तेरी दास्ताँ से पहले ।

तरस आता है मुझे अपनी मासूम सी पलको पर,

जब भीग के कहती है की अब रोया नहीं जाता।

खुदा भी न जाने कैसे रिश्ते बना देता है,

अंजानो को दिल में बसा देता है,

जिनको हम जानते भी न थे,

उन्हें जान से भी ज्यादा प्यारा बना देता है।

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हर शख्स को दिवाना बना देता है इश्क,

जन्नत की सैर करा देता है इश्क,

दिल के मरीज हो तो कर लो महोब्बत,

हर दिल को धड़कना सिखा देता है इश्क ।

अब न तेरे मिलने की ख़ुशी है और न तेरे बिछड़ने का गम,

न उस प्यार का दर्द है और न कोई एहसास,

फिर भी पूछ लेते है यार मेरे हमारी प्यार की दास्ताँ,

में भी कह देता हूँ वो था एक हसीन फ़साना जो अब नहीं रहा।

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