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शायरी : झुकी हुई निगाहों में कही मेरा ख्याल था दबी दबी हँसी में एक हसी सा गुलाल था…

वो करते है मोहब्बत की बात,

लेकिन मोहब्बत के दर्द का उन्हें एहसास नही,

मोहब्बत तो वो चाँद है जो दिखता तो है सबको,

लेकिन उसको पाना सबके बस की बात नही।

 

तेरी और मेरी मोहब्बत का भी रिजल्ट आया है,

और तुझे चाहने में मेरा नाम टॉप पर आया है.

कोई मरहम नहीं चाहिए जख्म मिटाने के लिए,

तेरी एक झलक ही काफी है मेरे ठीक हो जाने के लिए.

 

झुकी हुई निगाहों में, कही मेरा ख्याल था।

दबी दबी हँसी में एक हसी सा गुलाल था।

मै सोचता था, मेरा नाम गुनगुना रही है

वो न जाने क्यों लगा मुझे के मुस्कुरा रही है वो।

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