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शराब पी कर मरनेवाले को 2 लाख का मुआवजा देना चाहिए योगीजी…?

कहतें है की शराब यदि दवाई के रूप में ली जाय तो सेहत के लिए अच्छी होती है। आदि अनादि काल से शराब बनती और पीती आ रही है। महात्मा गांधीजी शराब के भारी विरोधी थे। उन्होनें कहा था की यदि उन्हें एकबार देश का शासन चलाने की सत्ता मिले तो पुरे हिन्दुस्तान में शराबबंदी लागू कर दे। गाँधी के गुजरात ने तो पहले से ही नशाबंदी की निति लागू की है। अन्य राज्यों में शराब पीना बेचना बनाना वैध है। फिर भी कईबार कच्ची शराब या जहरीली शराब बनाकर बेचनेका अवैध कारोबार चलता है। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी और बगल के उत्तराखंड में जहरीली शराब पिने से 100 से ज्यादा लोग मारे गए है। दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजी ने शराबकांड के कुछ दिनों बाद ब्यान दिया की ये समाजवादी पार्टी की साजिश है। उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए सपा के लोग अवैध शराब के कारोबारियों से मिल ये सबकुछ किया है। सपा ने तंज कसते हुए कहा की असल में तो प्रतिपक्ष ने सरकार को सूचित किया ही था लेकिन मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं किया। आरोप और प्रतिआरोप में लोग मर रहे है। योगी सरकार ने जहरीली शराब पी कर मरनेवाले को दो-दो लाख का मुआवजा देनेकी घोषणा भी की है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगीजी ने शराब काण्ड को सपा की साजिश करार कर दी। लेकिन सपा के कौनसे नेतागण या कार्यकर्ता इसमें लिप्त है उसकी भी जांच हो तो साजिश के तह तक जानेसे क्या ये वाकई में साजिश थी या सरकारने अपनी विफलता छिपाने के लिए इसे सियासत का रंग दे दिया है…? चुनाव में दूसरें राज्यों में जाकर दुसरे दल की सरकार या उसके मुख्यमंत्री को सलाह देना बढ़िया काम है। लेकिन अपने ही राज्य की अपने ही निर्वाचन क्षेत्र की अस्पताल में ओक्सीजन न मिलने से कई निर्दोष बच्चो की मौत हो जाना और वह भी महज इसलिए की अस्पताल में ओक्सीजन सप्लाय करनेवाली कम्पनी का बकाया बिल सरकार समय पर नहीं दे पाई इससे ओक्सीजन की आपूर्ति नहीं हुई और कई नवजात शिशुओं की भी असमय मौत हो गई। क्या ये सपा की या बसपा की कोई साजिश तो नहीं थी…? यदि ओक्सीजन सप्लाय करनेवाली निजी कम्पनी को बिल का भुगतान वक्त पर कर दिया जाता तो कई बच्चो की जाने बच जाती। ऐसा क्यों नहीं हुवा उसकी जानकारी आम लोगो तक नहीं पहुँचती।

योगी सरकार ने जहरीली शराब पीकर मरनेवालो के परिवार को दो-दो लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है। इस पर भी विचार और चिंतन होना चाहिए। जहरीली शराब पीनेवाले शराबी थे। शराब के पीछे पैसे और परिवार को बरबाद कर रहे थे। जहरीली शराब पी कर जान गवाना और फिर उस पर रहम करते हुए आर्थिक मुआवजा देना कतई उच्चित नहीं। ये पैसा जनता का है। दो दो लाख के हिसाब से करीब 2 करोड़ की राशि दी जायेंगी। इस तरह यदि ऐसे काण्ड में आर्थिक मुआवजा देनेकी प्रथा शुरू होंगी या पहले की सरकार भी देती थी तो ये सरकार भी दे तो उसमे बुरा क्या है ऐसी दलील खारिज़ के लायक गिनी जानी चाहिए। ऐसे शराबी को मुआवजा देने की बजाय ओक्सीजन के अभाव से किसी नवजात की मृत्यु न हो या ये राशि किसी स्कुल में कमरा बनाने के काम में आये तो ये एक अच्छा कदम होंगा। योगीजी सरकार मुआवजा की राशि दोषितो से वसूलीं जाय ऐसी कोई कारवाही करे तो ये बेहतर होंगा। ताकि दोषितो को जेल की सजा के साथ आर्थिक दंड भी मिले और जनता का पैसा भी दूसरें काम में आवंटन हो। योगीजी एक नई शुरुआत करे, दूसरें राज्यों में भी इसका एक सकरात्मक संदेशा पहुंचेंगा और जहरीली शराब बनानेवाले भी डरेंगे की उनकी शराब पी कर कोई मर गया तो मुआवजा भी उसे ही देना होंगा…! श्रीमान मुख्यमंत्री श्री योगीजी, क्या आप इसके लिए तैयार है…? चलो उदाहरण पेश करे…!

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