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विश्वकप के हुए तीन फाइनल मैचों में हारा इंग्लैंड, चौथा फाइनल न्यूजीलैंड से आज

लंदन: विश्व कप क्रिकेट मैचों में हार की हैट्रिक बनाने वाले इंग्लैंड ने अब चौथी बार ऑस्ट्रेलिया को हराकर फाइनल में पहुंच कर इतिहास रचा है अब देखना है कि वह फाइनल जीत पाएंगी। 1992 के बाद यह पहला मौका है जब क्रिकेट का जनक माने जाने वाला इंग्लैंड विश्व कप के खिताबी मुकाबले में पहुंचा है। 44 साल के इस टूर्नामेंट को इंग्लैंड ने कभी नहीं जीता है। अब रविवार को टीम का मुकाबला न्यूजीलैंड के साथ होगा जो लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा है। देखते हैं विश्व कप फाइनल में अभी तक इंग्लैंड का प्रदर्शन कैसा रहा है-

इंग्लैंड 1992 में विश्व कप के फाइनल में पहुंचा था। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हुए इस फाइनल मुकाबले को वसीम अकरम की उन दो गेंदों के लिए याद किया जाता है जिनमें उन्होंने एलन लैंब और क्रिस लुईस को आउट किया था। खेल के अहम पड़ाव पर मिले इन दो विकेटों ने इंग्लैंड को खिताब से दूर किया और पाकिस्तान पहली बार विश्व चैंपियन बना। पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और कप्तान इमरान खान के 72 और जावेद मियांदाद के 58 रनों की पारी खेली। पाक टीम को असल रफ्तार, इंजमाम उल हक 35 गेंदों पर 42 रन और अकरम 18 गेंदों पर 33 रन, ने दी। इन्हीं की बदौलत टीम ने 50 ओवरों में 6 विकेट पर 249 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। इंग्लैंड की शुरुआत तो अच्छी नहीं रही। इयान बॉथम खाता खोले बिना अकरम का शिकार बने। 59 रनों तक इंग्लैंड के चार बल्लेबाज पविलियन लौट चुके थे। लेकिन इसके बाद नील फेयरब्रदर और एलन लैंब स्कोर को 141 तक ले गए। यहीं अकरम की वे दो गेंदें आईं जिन्होंने पहले लैंब और फिर लुईस को बोल्ड कर इंग्लैंड को बैकफुट पर धकेल दिया। और जब फेयरब्रदर 62 रन बनाकर लौटे तो इंग्लैंड का स्कोर 7 विकेट पर 180 रन था। डरमट रीव, डेरेक प्रिंगल, फिलिप डिफ्रेटिस और रिचर्ड लिंगवर्थ के प्रयास नाकाफी रहे। इंग्लैंड 227 रनों पर ऑल आउट हो गया। पाकिस्तान ने 22 रनों से मुकाबला जीता। पाकिस्तान की ओर से मुश्ताक अहमद और वसीम अकरम ने तीन-तीन विकेट लिए।

इंग्लैंड की टीम फाइनल खेलने कोलकाता पहुंच चुकी थी। सेमीफाइनल में ग्राहम गूच की सेंचुरी ने भारत के सपने को तोड़कर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी। लेकिन माइक गैटिंग के रिवर्स स्वीप ने इंग्लैंड को ऐसी मुश्किल में फंसाया कि टीम अपना खिताब पाने से महरूम रह गई। इस एक शॉट ने ऑस्ट्रेलिया, जो उस समय काफी कमजोर समझी जा रही थी, को न सिर्फ खिताब दिलाया बल्कि ऐलन बॉर्डर को ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी को मजबूत किया। बॉर्डर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। डेविड बून 75 रनों की पारी खेली। ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवरों में पांच विकेट पर 253 रन बनाए। और जवाब में इंग्लैंड तमाम कोशिशों के बावजूद 8 विकेट पर 246 रन ही बना पाया।

इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रेयरली ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया। स्कोरबोर्ड पर 22 रन थे जब गॉडन ग्रीनिच आउट होकर पविलियन लौटे। इसके बाद दुनिया ने जो देखा वह विवियन रिचर्डस शो था। उन्हें कॉलिस किंग का साथ मिला। 99 के स्कोर पर वेस्ट इंडीज के चार बल्लेबाज पविलियन लौट चुके थे। एक छोर पर रिचर्डस जमे और दूसरे छोर पर किंग। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 139 रनों की साझेदारी की। किंग अधिक आक्रामक रहे 66 गेंदों पर 86 रन बनाकर किंग आउट हुए। तब स्कोर था 238। किंग ने अपनी पारी में 10 चौके और तीन छक्के लगाए। आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर रिचर्ड्स यहां सहायक की भूमिका में थे। वेस्ट इंडीज ने निर्धारित 60 ओवरों में 9 विकेट पर 286 रन बनाए। रिचर्डस 138 रन बनाकर नाबाद रहे। पहले विकेट के लिए बेयरली और जेफ्री बॉयकॉट ने पहले विकेट के लिए 129 रनों की साझेदारी की। माइकल होल्डिंग ने बेयरली 64 और बॉयकॉट 57 को आउट किया। इंग्लैंड का स्कोर दो विकेट पर 183 रन था। लेकिन इसके बाद जो गार्डन का शो शुरू हुआ। उन्होंने कुल 5 विकेट लिए और लिए। इंग्लैंड की पूरी टीम 194 रनों पर आउट हो गई। इंग्लैंड के आखिरी सात बल्लेबाजों में पांच ने खाता भी नहीं खोला। एडमंड्स 5 रन बनाकर नाबाद रहे। वेस्ट इंडीज ने मैच 92 रनों से जीता।

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