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लगभग दो दशकों बाद कांग्रेस को मिल सकता है गैर-गांधी अध्यक्ष

नई दिल्ली : अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस को अब नए कांग्रेस मुखिया की तलाश है। कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद पार्टी को 21 साल बाद अब कोई गैर-गांधी अध्यक्ष मिल सकता है। इससे पहले सीताराम केसरी 1996 से 1998 तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे, जो गांधी परिवार से नहीं थे। कांग्रेस वर्किंग कमेटी को अब नया अध्यक्ष चुनना होगा। खबर है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

चुनावी हार के बाद कांग्रेस में जारी नेतृत्व संकट के बीच यह समझना महत्वपूर्ण है कि आजादी के बाद गांधी परिवार से संबंध न रखने वाले कौन से नेता पार्टी अध्यक्ष बने। इस सूची में सबसे पहला नाम जेबी कृपलानी का आता है जो 1947 में सत्ता हस्तांतरण के समय कांग्रेस के अध्यक्ष थे। इसके बाद अगले दो साल तक आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले नेता पट्टाभि सीतरमैया ने यह जिम्मेदारी संभाली। भारत रत्न पुरुषोत्तम दास टंडन 1950 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इसके बाद 1955 से 59 तक यूएन ढेबर इस पद पर रहे। ढेबर से पहले जवाहरलाल नेहरू और बाद में इंदिरा गांधी को 1959 में कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।

गैर-गांधी कांग्रेस अध्यक्षों में अगला नाम नीलम संजीव रेड्डी (1960-63), के. कामराज (1964-67), एस निजालिंगप्पा (1968-69) का है। इसके बाद कांग्रेस का नेतृत्व ‘बाबूजी’ के नाम से मशहूर बिहार से ताल्लुक रखने वाले दिग्गज नेता जगजीवन राम के कंधों पर आया। वह 1970-71 तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। जगजीवन राम के बाद शंकर दयाल शर्मा (1972-74) कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए, जो आगे चलकर देश के राष्ट्रपति भी बने। इस सूची में अगला नाम असम से आने वाले देवकांत बरूआ का है, जो आपातकाल के समय कांग्रेस के अध्यक्ष थे।

1977 से 78 तक केबी रेड्डी कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, जो गांधी परिवार से नहीं थे। इसके बाद गैर-गांधी परिवार से पीवी नरसिम्हा राव 1991 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने। वह इस पद पर 1996 तक रहे। इस दौरान वह देश के प्रधानमंत्री भी रहे। 1996 में सीताराम केसरी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था और वह सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने तक इस पद पर रहे। इस समय कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार के तीन लोगों का दबदबा है। ऐसे में अगला गैर-गांधी अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि सुशील कुमार शिंदे या मल्लिकार्जुन खड़गे को पार्टी का अगला अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

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