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योग हमे ख़ुद से मिलाता हैं,योग ईश्वर की अनुभूति दिलाता हैं योग शरीर , मन और आत्मा को जोड़ने का विज्ञान

योग कोई धर्म नहीं है , योग तो एक विज्ञान है , योग कल्याण का विज्ञानं है योग यौवन का विज्ञान है , योग शरीर , मन और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का विज्ञान है . योग जीवन का वह दर्शन है जो मनुष्य को अपनी आत्मा से जोड़ता है . योग सिर्फ आत्म सुधार के बारे में नहीं बतलाता है,बल्कि यह आत्म स्वीकृति के बारे में सिखाता है.

योग एक मन और शरीर का अभ्यास है जो 5,000 वर्ष का प्राचीन भारतीय इतिहास रखता है . योग की विभिन्न शैलियाँ , शारीरिक मुद्राएं , सांस लेने की तकनीक और ध्यान व विश्राम को एक साथ जोड़ता है .

 

इन्ही कुछ वर्षो में योग शारीरिक व्यायाम के रूप में दुनिया भर में लोकप्रिय हुआ है . जो मन आर शरीर को बेहतर नियंत्रण को बढ़ावा देता है .योग अभ्यास के भीतर कई अलग अलग प्रकार के योग और उनके आनुशाशन हैं  यह लेख इतिहास और योग की विभिन्न शाखाओं की पडताल करता है . क्या है योग :योग का साधारण सा अर्थ है “संघ”(union) .

आत्मा का परमात्मा से मिल. शरीर और मन का आत्मा से मिलन , या अपने ईगो और अपनी रूह का परमात्मा से मिलन . योग एक हिन्दू आध्यात्मिल और तवास्वी अनुशाशन है जिसके अभ्यास में सांस नियंत्रण , सरल ध्यान और विशिष्ट शारीरिक मुद्राएं है. योग का मूल सन्दर्भ आद्यात्मिक विकास अभ्यास था जो खुद के शरीर के बारे में जरुक करता है . योग द्वारा हम हमारे वास्तविक स्व को महसूस करते हैं और उसके करीब जाते हैं.

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