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मोदी ने नहीं बताया था नोटबंदी का असली मकसद, एक साल बाद जेटली ने खोला था वो राज

साल 2016 के 8 नवंबर को देश में केन्द्र सरकार ने सबसे बड़ा फैसला लिया था। मोदी सरकार ने एक झटके में रात के आठ बजे घोषणा कर दी थी कि 500 और 1000 रुपये के नोट आज से चलन में नहीं रहेंगे। मोदी ने इसका मकसद कालेधन पर लगाम लगाना बताया था। हालांकि नोटबंदी का असली मकसद मोदी ने नहीं बताया था। दो साल बाद इसी साल 2018 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वो राज खोला था। आइए हम आपको बताते हैं कि अरुण जेटली ने क्या बताया था नोटबंदी का असली मकसद।

8 नवंबर को देश रह गया था स्तब्ध

8 नवंबर 2016 को पीएम मोदी मन की बात करने आये थे तो सबकुछ सामान्य था। अचानक मोदी ने कुछ ऐसी घोषणा कर दी कि पूरे देश में हड़कंप मच गया। पीएम ने एक झटके में 500 और 1000 रुपये के नोटों का चलन ही बंद करवा दिया था। इसका मकसद मोदी ने कालेधन पर लगाम और नकली नोटों को देश से बाहर करना बताया था। इस फैसले का काफी विरोध भी हुआ था।

अरुण जेटली ने एक साल बाद बताया असली मकसद

साल 2016 में मोदी ने नोटबंदी का मकसद कालेधन पर रोक और नकली करेंसी पर लगाम लगाना बताया था। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट जब अगस्त 2017 में आई तो उस पर नोटबंदी पर सवाल उठाये गये। इस दौरान अरुण जेटली ने नोटबंदी की असली वजह डिजिटलाइजेशन बताई थी। उनका कहना था कि सरकार देश से नकद के लेनदेन को कम करना चाहती थी, इस वजह से नोटबंदी की गयी थी।

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