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मॉनसून में विलंब के बीच सूखते जलाशयों ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली: मानसून आने में हो रही एक-एक दिन की देरी चिंता का विषय बनती जा रही है। पिछले एक सप्ताह में बढ़ती गर्मी की वजह से जलाशयों में पानी का स्तर कुछ राज्यों में 4 फीसदी से 5 फीसदी तक घट गया है। झुलसाती गर्मी और बारिश के इंतजार में देश भर के जलाशय सूखते जा रहे हैं।

सबसे बुरी स्थिति महाराष्ट्र में है। मॉनसून की बारिश आने में देर हुई तो हालात बहुत ख़राब हो सकते हैं। 30 मई को महाराष्ट्र के 17 बड़े जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से 60 फीसदी नीचे गिर चुका था। जबकि 6 जून को पानी का स्तर और घटकर 64 फीसदी नीचे पहुंच गया है। इस बीच भारत सरकार का दावा है कि हालात पर उसकी नज़र है। जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद का आश्वासन भी सरकार ने दिया है।

इस बारे में केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि नियमों के मुताबिक जो भी आदेश होगा कि इतना अनाज चाहिए। इस दर पर दीजिए। हम दे देंगे। हमारे पास अनाज की कमी नहीं है। एक स्थाई व्यवस्था है और कमेटी है जो तय करेगी की क्या करना ज़रूरी है। आपको बता दें कि इस बार मॉनसून एक सप्ताह पीछे चल रहा है, लेकिन समंदर की ओर से उमड़ते बादलों ने दक्षिण भारत के राज्यों में अब कुछ उम्मीद बढ़ा दी है।

शुक्रवार को यहां कई इलाकों में बादल छाए रहे। केरल के वायनाड में बारिश भी हो गई, लेकिन मॉनसून के आगमन का एलान करने के लिए इतना ही काफ़ी नहीं है। मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून जल्दी ही केरल में दस्तक देने वाला है।

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