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मुंबई विश्वविद्यालय का बजट: परियोजनाओं के लिए करोड़ों आवंटित, नहीं किए जा रहे है खर्च

मुंबई:मुंबई विश्वविद्यालय का बजट आंकड़ों का कागजी व्यवहार बनकर रह गया। साल दर साल, विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए करोड़ों रुपये दिखाए जाते है। साल बीतता है और एक भी पैसा खर्च नहीं हो पाता। दोबारा नए बजट में एक बार फिर उसी मद के लिए करोड़ों रुपये दिखा दिए जाते हैं। योजना को कागज पर जीवित रखने के लिए एक-एक हजार रुपये खर्च दिखा दिया जाता है।

फरवरी के आखरी सप्ताह में कुलपति ने केवल 10 सदस्यों की मौजूदगी में 650 करोड़ रुपये का बजट व्यवस्थापन परिषद में पास करवा लिया है। इसे अंतिम मंजूरी के लिए 25 मार्च को सीनेट की बैठक में रखा जाएगा। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2019-20 के लिए इस तरह के कागजी बजट का प्रारूप बनकर तैयार है। वर्ष 2018-19 के बजट में विश्वविद्यालय ने छात्रों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए कई घोषणाएं की थीं। इनको क्रियान्वित करने के लिए बजट में करोड़ों रुपये का प्रावधान भी किया गया था। 31 अक्टूबर 2018 को योजनाओं की समीक्षा हुई तो खुलासा हुआ कि स्किल डिवेलपमेंट जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर एक भी रुपये खर्च नहीं हो पाया है।

सिंधदुर्ग और पालघर में स्किल डिवेलपमेंट सेंटर के लिए पिछले बजट में 5 लाख रुपये आवंटित किए थे। एक भी पैसा खर्च नहीं करने के बावजूद सिंधदुर्ग के स्किल सेंटर के लिए आगामी बजट में 2 करोड़ 5 लाख व पालघर के लिए 1 करोड़ 5 लाख रुपये आवंटित कर दिए गए हैं। विश्वविद्यालय ने प्रमुख योजनाओं के लिए 10 से 12 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जिनमें से 31 अक्टूबर तक एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है। इसी तरह प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया योजना के अंतर्गत वर्ष 2018-19 के बजट में कृषि, इन्फ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, डिफेंस केंद्रों के लिए 5-5 लाख रुपये का प्रावधान किया गया, लेकिन इन पैसों का भी इस्तेमाल नहीं किया गया।

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